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अवमानना में स्पष्टीकरण के लिए बुलाए जाने के खिलाफ अपील प्रचलनशील नहीं

अवमानना में स्पष्टीकरण के लिए बुलाए जाने के खिलाफ अपील प्रचलनशील नहीं

हाईकोर्ट में रक्षा सचिव और अन्य को बुलाए जाने के खिलाफ दायर अपील खारिज
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
मप्र हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि अवमानना मामले में गुण-दोष के आधार पर दिए गए आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान है, लेकिन अवमानना मामले में संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण के लिए बुलाए जाने के खिलाफ अपील प्रचलनशील नहीं है। इस अभिमत के साथ एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की डिवीजन बैंच ने स्टेशन हेड क्वार्टर जबलपुर की ओर से दायर अपील खारिज कर दी है। यह अपील हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा 18 अगस्त 2020 को जारी उस आदेश के खिलाफ की गई थी, जिसमें रक्षा मंत्रालय के सचिव अजय सिंह, ब्रिगेडियर वीके सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल रणदीप सिंह स्टेशन हेड क्वार्टर सुखलालपुर जबलपुर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था।
यह है मामला -  पोलीपाथर जबलपुर निवासी केवल कुमार जग्गी एवं उनके परिजनों की डुमना के समीप स्थित 50 एकड़ जमीन वर्ष 2012 में सेना ने अपने कब्जे में ले ली थी। उन्होंने जमीन का मुआवजा दिलाने की माँग को लेकर वर्ष 2015 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।  हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 30 अगस्त 2017 को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 6 माह के भीतर मुआवजा का निर्धारण कर भुगतान किया जाए। 
तीसरी बार दायर की गई अवमानना याचिका 
 अधिवक्ता मनोज शर्मा ने बताया कि आदेश का पालन नहीं होने पर 28 मार्च 2018 को पहली अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें हाईकोर्ट ने आदेश का पालन करने के लिए 6 माह का समय और दे दिया। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो दूसरी अवमानना याचिका 23 अक्टूबर 2018 को दायर की गई। सेना की ओर से बताया गया कि इस मामले में 27 सितंबर 2019 को कलेक्टर जबलपुर द्वारा मुआवजे का अवार्ड पारित किया जा चुका है। मुआवजा वितरण के लिए प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा गया है, इसके लिए हाईकोर्ट से तीन माह के समय की माँग की गई, लेकिन तय समय में आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद 2 मार्च 2020 को तीसरी अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें 18 अगस्त 2020 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने रक्षा मंत्रालय के सचिव और अन्य अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील डिवीजन बैंच ने खारिज कर दी है।    
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।