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CM के निर्देश - मंत्रालय में दो शिफ्टों में काम पर हो विचार, जानिए - क्या है कर्मचारी संगठन की मांग 

CM के निर्देश - मंत्रालय में दो शिफ्टों में काम पर हो विचार, जानिए - क्या है कर्मचारी संगठन की मांग 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कोरोना संक्रमण के नए फैलाव को देखते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंत्रालय में दो शिफ्ट में कामकाज करने को लेकर विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाए कि वर्क फ्राम होम से कितना काम चल सकता है। मुख्यमंत्री ने मंत्रालय के अधिकारियों-कर्मचारियों को कोरोना टीका लगाने के लिए प्राथमिकता देने को कहा है। मंगलवार को राजपत्रित अधिकारी महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कार्यालयीन समय के लिए 10 से 5 वाली मानसिकता बदलनी पड़ेगी। इस दौरान महासंघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि इन दिनों मंत्रालय आने वाले आगंतुकों की संख्या बहुत बढ़ गई है। इस पर रोक लगनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में एक दो दिनों में फैसला लेंगे। उन्होंने कहा कि हर रोद मंत्रालय आने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की सेहत की जांच के लिए स्थाई व्यवस्था तैयार की जाए। जिससे प्रवेश से पहले उनकी जांच हो सके।      

कर्मचारी संगठन की मांग

मंत्रालय में कई अधिकारियों-कर्मचारी के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद अब आगंतुकों के मंत्रालय प्रवेश पर पाबंदी की मांग उठ रही है। मंत्रालय अधिकारी संगठन के बाद अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मध्यवर्ती संगठन के अध्यक्ष भाऊ साहब पठाण ने डेढ़ माह के लिए मंत्रालय में आगंतुकों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है।

संगठन की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार  

मंत्रालय के कर्मचारी और अधिकारी वर्ग में कोरोना संक्रमित होने की दर तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा कैबिनेट के कई मंत्री भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। राजस्व विभाग के आठ कर्मचारियों सहित अन्य विभाग के कर्मचारी कोरोना की चपेट में आए हैं। ऐसे में तत्काल एहतियाती उपाय के रूप में मंत्रालय में आगंतुकों के आने पर कम से कम डेढ़ महीने के लिए रोक लगाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे और मुख्य सचिव को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मध्यवर्ती महासंघ की तरफ से लिखे पत्र में अध्यक्ष पठाण ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारी सहित अधिकारी वर्ग को इस बारे में दिशा-निर्देश और एहतियाती कदम उठाने के आदेश जारी किए हैं, लेकिन प्रत्यक्ष रूप में कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है, ऐसे में कर्मचारियों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है। मास्क, सुरक्षित दूरी, तापमान माप, सैनिटाइजेशन के बारे में सरकार की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।