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दैनिक भास्कर हिंदी: विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में मिले दिव्यांगो को सुविधाएं : हाईकोर्ट

July 18th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में दिव्यांगो को कम से कम बुनियादि सुविधाएं जरुर दी जाए जिसके तहत कालेजों में उनके अनुरुप शौचालय व प्रवेश के लिए रैंप बनाए जाए। ताकि वे आसानी से कालेज के भीतर जा सके। हाईकोर्ट ने इसके लिए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को महाराष्ट्र के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी करने कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार सुनिश्चित करे कि शैक्षणिक संस्थानों में पर्सन विथ डिसेबिलिटी एक्ट 2016 के प्रावधानों को लागू किया जाए। कोर्ट ने नगर विकास विभाग के सचिव को भी जिला परिषद व महानगरपालिकाओं को निर्देश जारी करने को कहा है।

जस्टिस नरेश पाटील व जस्टिस गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि सरकार शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश जारी करते समय कानूनी पहलू के साथ ही मानवीय दृष्टिकोण पर भी विचार करे। खंडपीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर(कुलपति) भी यह सुनिश्चित करे कि उनसे संलग्न कालेजों में भी दिव्यांगों को बुनियादि सुविधाएं मिले। कॉलेज दिव्यांगो को सुविधाएं दे रहे है कि नहीं इसकी पड़ताल के लिए विश्वविद्यालय अपनी कमेटी से रिपोर्ट मंगाए। 
वहीं विश्व विद्यालय अनुदान आयोग की अोर पैरवी कर रहे अधिवक्ता रुई राड्रिक्स ने कहा कि हमने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे दिव्यांगों को अपने यहां ऐसा परिवेश प्रदान करे जिससे उन्हें दिक्कत का सामना न करना पडे। वहीं अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने मंजूरी मांगनेवाले कालेजों के सामने शर्त रखी है कि वे दिव्यांगो के लिए जरुरी इंतजाम करे तभी उन्हें मंजूरी दी जाएगी।

इन दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि एआईसीटीई की तरह राज्य सरकार भी मंजूरी मांगनेवाले कालेजों के सामने दिव्यांगों को सुविधाएं देने की शर्त रखे। खंडपीठ ने कहा कि मुंबई को छोड़ दे तो राज्य के अन्य इलाकों में कालेजों के बड़े-बड़े कैंपस है जहां उनके लिए दिव्यांगो को बुनियादी सुविधाएं देना मुश्किल नहीं है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ के सामने कहा गया कि कालेजो में विकलांगो के लिए अलग से लिफ्ट की भी व्यवस्था हो। खंडपीठ ने कहा कि हम इस मुद्दे पर बाद में विचार करेंगे।