दैनिक भास्कर हिंदी: हिंदुत्व की डोर से बंधे हैं भाजपा-शिवसेना, उद्धव ने कहा- इसलिए फिर हुआ गठबंधन

April 2nd, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन तय होने से पहले तक दिन-रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोसने वाले शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के सुर अब एक दम बदल गए हैं। उन्होंने सफाई दी है कि तमाम मतभेदों के बावजूद इस लिए भाजपा के साथ युति कि क्योंकि दोनों दल हिंदुत्व की डोर से बंधे हुए हैं। पार्टी के मुखपत्र को दिए लंबे इंटरव्यू में उद्धव ने कहा कि मोदी फिर से सत्ता में वापसी करेंगे हालांकि उन्होंने भाजपा के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की संकल्पना से से सहमति नहीं जताई। चुनाव घोषित होने के बाद अपनी भूमिका बदलने की बावत उद्धव ने सफाई दी है कि पिछले चार-पांच वर्षों से शिवसेना को सत्ता में रह कर इस लिए विपक्ष की भूमिका निभाई पड़ी क्योंकि महाराष्ट्र सहित पूरे देश में विपक्ष खत्म जैसा हो गया था। जनता की आवाज कोई नहीं उठा रहा था। युति के टूटने के बाद दोबारा एक साथ आने के सवाल पर उद्धव ने कहा कि विपक्ष के पास कोई नेता नहीं है। विरोधी जबरन एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। इंदिरा गांधी के इमरजेंसी के वक्त विपक्ष के पास जयप्रकाश नारायण जैसे नेता थे। लेकिन इस वक्त तो विपक्ष के पास ऐसा कोई नेता भी नहीं। 

कांग्रेस मुक्त भारत का समर्थन नहीं

भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत के नारे को लेकर उद्धव ने कहा कि मैं इसका समर्थक नहीं हूं। बाला साहेब ने एक बार मुझ से कहा था कि मुख्यमंत्री पर तो जिम्मेदारी होती ही है पर विपक्ष पर उससे बड़ी जिम्मेदारी होती। जनता को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी विपक्ष की होती है। कांग्रेस मुक्त की बात फालतू है। हालांकि आज कांग्रेस की अवस्था नेताविहिन की हो गई है। आज कांग्रेस के पास नरसिम्हा राव जैसे नेता नहीं हैं। 

शिवसेना के मुख्यमंत्री पर गोलमोल 

इस सवाल पर उद्धव ने कहा कि अधिकार के साथ-साथ जिम्मेदारी का भी अहसास होना चाहिए। शिवसेना का मुख्यमंत्री हो इसके लिए हाथ-पैर मार रहा हूं। यह पूछे जाने पर कि शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा? उद्धव ने कहा कि युति की घोषणा के वक्त हुए पत्रकार परिषद में कहा गया था कि अधिकारों का समान वितरण होगा। अब इसको जो मतलब निकालना हो निकाल लो। भाजपा के साथ यह संबंध कब तक टिकेगा? इस पर उद्धव ने कहा कि मैं धोखा नहीं दूंगा, तुम (भाजपा) भी मत देना। उन्होंने कहा कि आगामी 25 वर्षों तक यह संबंध टिकेगा। पर यह भी सोचना होगा कि पांच वर्षों तक हमारे बीच संघर्ष क्यों हुआ। 

 
 

खबरें और भी हैं...