दैनिक भास्कर हिंदी:  कैलीफोर्निया की स्ट्राबेरी अब छिंदवाड़ा जिले में भी उगाई जा रही

January 9th, 2021

परंपरागत खेती से हटकर बिछुआ के युवा किसान ने लगाई स्ट्राबेरी की फसल, फलों का उत्पादन शुरू
डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा।
संतरा, मौसंबी और अनार के बाद अब जिले में विदेशी फल स्ट्राबेरी का उत्पादन भी शुरू हो गया है। परंपरागत खेती से हटकर बिछुआ के युवा किसान ने अपने खेत में वैज्ञानिक पद्धति से स्ट्राबेरी की फसल लगा रखी है। मूल रूप से कैलीफोर्निया के इस फल की लोकल उपज बाजार में भी आ गई है। हालांकि स्ट्राबेरी की खेती पहली बार प्रयोग के तौर पर ही हो रही है।बिछुआ के युवा किसान व बीएससी एग्रीकल्चर थर्ड ईयर के छात्र वेदांत पिता लाखाजी माटे ने करीब 4 हजार वर्गफीट में स्ट्राबेरी लगा रखी है। महाराष्ट्र के महाबलेश्वर से 2 हजार पौधे लाकर उन्होंने खेती शुरू की है। आधुनिक तरीके से उन्होंने मल्चिंग व ड्रिप के जरिए फसल तैयार की है। नवंबर माह में लगाए गए पौधों ने फल देना शुरू कर दिया है।
फिलहाल बाजार की समस्या:
युवा किसान वेदांत के मुताबिक स्ट्राबेरी के फल निकलने लगे हैं। पैकिंग कर वे जिला मुख्यालय के बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं। वेदांत के मुताबिक फलों का उत्पादन तो हो रहा है लेकिन लोकल बाजार में उन्हें उम्मीदों के अनुसार प्रतिसाद नहीं मिल रहा है।
तंसरामाल और सिल्लेवानी में भी खेती:
स्ट्राबेरी की खेती उमरानाला के पास तंसरामाल और सिल्लेवानी के पास तारा गांव में भी की जा रही है। यहां पॉलीहाउस में स्ट्राबेरी के पौधे लगाए गए हैं। यहां भी पहली बार प्रयोग के तौर पर उक्त खेती हो रही है। फलों का उत्पादन भी शुरू हो गया है।
कैसा स्वाद, क्या है गुण:
स्ट्राबेरी का फल लाल रंग हल्के खट्टे स्वाद का होता है। जानकारों के मुताबिक इसमें औषधीय गुण भी है। हार्ट अटैक से बचाव, ब्लड प्रेशर, आंखों के रोग, डायबिटीज पर प्रभावी, दांतों में चमक और चेहरे की सुंदरता के लिए उपयोगी माना जाता है।
देश में और कहां इसकी खेती:
भारत में स्ट्राबेरी की खेती पर्वतीय भागों में नैनीताल, देहरादून, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, नीलगिरी और दार्जिलिंग आदि के पहाड़ी इलाकों में व्यवसायिक तौर पर उत्पादन हो रहा है। मप्र के रतलाम और अब छिंदवाड़ा में भी संभावनाएं बढ़ गई हैं।
जिले में 31 हजार हेक्टेयर फलों की खेती:
मल्टी क्लाइमेट छिंदवाड़ा जिले में फलों की खेती का रकबा कुल 31 हजार हेक्टेयर है। इसमें सबसे ज्यादा 23 हजार हेक्टेयर में संतरे की खेती होती है। पांढुर्ना व सौंसर से शुरू हुई संतरे की खेती को अब मोहखेड़ और बिछुआ के किसानों ने भी अपना लिया है। आम, नीबू, आंवला, पपीता, मौसंबी और अनार की खेती भी यहां हो रही है। मौसंबी सौ से डेढ़ सौ हेक्टेयर में तो अनार करीब सौ हेक्टेयर में उगाया जा रहा है।
फलों की खेती की पर्याप्त संभावनाएं:
जिले में परंपरागत खेती के अलावा उद्यानिकी में पर्याप्त संभावनाएं हैं। सब्जी के अलावा किसानों का रुझान फलों की खेती की ओर बढ़ रहा है। मौसंबी और अनार के साथ ही अब किसान प्रयोग के तौर पर स्ट्राबेरी उगा रहे हैं।
- एमएल उइके, उप संचालक उद्यानिकी
 

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