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‘दो धारी तलवार’ से मुश्किल में पड़े उम्मीदवार, चुनाव में जमकर हुआ सोशल मीडिया का दुरुपयोग

‘दो धारी तलवार’ से मुश्किल में पड़े उम्मीदवार, चुनाव में जमकर हुआ सोशल मीडिया का दुरुपयोग

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भारत की सवा अरब की आबादी में करीब 81 करोड़ लोगों के पास फोन है। लगभग 30 करोड़ लोगों की जेब में स्मार्टफ़ोन हैं। इनमें से 16 करोड़ लोग फेसबुक पर सक्रिय हैं और जबकि इतने ही लोग हमेशा व्हाट्सऐप पर रहते हैं। इन आंकड़ों को देख कर समझा जा सकता है कि नेताओं को चुनाव के वक्त सोशल मीडिया इतना प्रिय हथियार क्यों लगता है और राजनातिक पार्टियां ऑनलाइन कैंपेन या कहें सोशल मीडिया के इस्तेमाल को तवज्जो क्यों दे रहीं हैं। पर अब यही सोशल मीडिया उनके लिए परेशानी का सबब भी बन रहा है। इस विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया का जमकर दुरुपयोग हुआ है। उम्मीदवारों के खिलाफ अफवाह फैलाने और उनकी छवि खराब करने के लिए भाषणों के वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की सैकड़ों घटनाएं सामने आई हैं। मामला पुलिस स्टेशन तक भी पहुंचा। कई मामलों में इन फर्जी वीडियो पर विश्वास कर कुछ न्यूज चैनलों ने भी खबरे प्रसारित कर दी। चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवार की छवि खराब करने के लिए किस तरह सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया गया, उसकी कुछ बानगी देखिए

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ से कांग्रेस उम्मीदवार परेशान

मुंबई कि चांदीवली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व मंत्री नसीम खान को सोशल मीडिया पर अपना फर्जी वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना पड़ा। वायरल वीडियो उस भाषण का हिस्सा है जिसमें खान ने तीन साल पहले एक उर्दू अखबार के कार्यक्रम के दौरान कहा था कि ‘दिल्ली में यमुना किनारे श्री श्री रविशंकर ने राजनाथ सिंह की मौजूदगी में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे। उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा क्या। मोदी और राजनाथ सिंह में हिम्मत हो तो देशद्रोह का मुकदमा चला कर दिखाएं।’ इसी भाषण को काटछांट कर ऐसा तैयार किया गया जैसे कांग्रेस उम्मीदवार खान पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं और अपने खिलाफ कार्रवाई की चुनौती दे रहे हैं।

पंकजा पर धनंजय की टिप्पणी

बीड जिले की परली सीट से राज्य की महिला व बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे और उनके चचेरे भाई धनंजय मुंडे आमने-सामने हैं। एक जनसभा के दौरान धनंजय ने अपनी चचेरी बहन पंकजा के बारे में कुछ टिप्पणी की। बाद में उनके भाषण की जो वीडियो क्लिप वायरल हुई उसमें धनंजय भाजपा उम्मीदवार व अपनी बहन पंकजा के बारे में आपत्तिजनक बाते करते हुए दिखाई दिए। इस वीडियो के सामन  आने के बाद परली की माहौल बदल गया। लोगों ने एक भाई द्वारा बहन के खिलाफ की गई इस तरह की टिप्पणी नागवार गुजरी। मामला पुलिस स्टेशन तक पहुंच चुका है। हालांकी धनंजय अपनी सफाई कह चुके हैं कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर तैयार किया गया है। मैं इस तरह की बात करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। उन्होंने वीडियो की फोरेंसिक जांच की मांग की है।

एक उम्मीदवार का दूसरे को ‘फर्जी’ समर्थन

मतदान के दिन प्रतिष्ठित न्यूज चैनलों के फर्जी स्क्रिनशॉट तैयार कर मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए फर्जी खबरे सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई कि ‘कोल्हापुर में शिवसेना-शिवसेना उम्मीदवार संग्राम सिंह कुपेकर के समर्थन में निदर्लिय उम्मीदवार शिवाजी पाटील ने समर्थन दे दिया है।’ इस फर्जी खबर को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के लिए एक मराठी न्यूज चैनल के लोगो का इस्तेमाल किया गया। फोटोशॉप की मदद से ‘ब्रेकिंग न्यूज’ के स्क्रिनशॉट तैयार कर वायरल किया गया। इस मामले में न्यूज चैनल ने पुलिस में शिकायत की है।

लपेटे में मंत्री राम शिंद भी

अहमदनगर की जामखेड-कर्जत सीट से भाजपा उम्मीदवार राज्य के जल संरक्षण मंत्री राम शिंदे का मुकाबला राकांपा अध्यक्ष शरद पवार के पौत्र रोहित पवार से हैं। चुनाव के दौरान शिंदे को बदनाम करने के लिए उनके मार्फ फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए। शिंदे बताते हैं कि ‘मेरी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर ऐसी तस्वीर वायरल की गई कि मैं वारकरी होते हुए भी नॉनवेज खा रहा हूं।’चुनाव जीतने के लिए सोशल मीडिया का इस कदर दुरुपयोग दुखद है। सायबर क्राईम विशेषज्ञ प्रशांत माली के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में फेक न्यूज और सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार ने तीन महिनों के भीतर नीति बनाने का वादा किया है। इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े कानून और उस पर सख्ती से अमल की जरुरत है। यूरोपी यूनियन में आपत्तिजनक पोस्ट को एक घंटे के भीतर न हटाने पर करोड़ों रुपए का जुर्मना लग जाता है। पर भारत में फिलहाल इस तरह की सख्ती नहीं है।
                                     
                          

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