दैनिक भास्कर हिंदी: कानून बदलने की मांग करने वाले पहले अपने मन को बदलें : रामदास आठवले

September 7th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। दलित शब्द के इस्तेमाल पर न्यायालय की रोक से असहमति जताते हुए आंबेडकरवादी नेता व केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि दलित को दलित कहने में कोई परहेज नहीं किया जाना चाहिए। दलित शब्द तो ऊर्जा देता है। दलित शब्द का इस्तेमाल कायम रखने का निवेदन लेकर उनकी पार्टी उच्चतम न्यायालय में जाएगी। दलित उत्पीड़न प्रतिबंधक कानून एट्रोसिटी को लेकर सवर्णों के विरोध को अनुचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि कानून बदलने की मांग करने के बजाय लोगों को अपना मन बदलना चाहिए। दलितों पर अत्याचार नहीं होगा, तो एट्रोसिटी किसी पर क्यों लगेगा। रविभवन में प्रेस कांफ्रेंस आठवले बोल रहे थे। 

दलित शब्द अपमानजनक नहीं
एक याचिका पर बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर बेंच ने दलित शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश जारी किया है। आठवले ने कहा कि न्यायालय के निर्णय का वे विराेध नहीं कर रहे हैं, लेकिन दलित शब्द जनभावना के साथ है। दलित के नाम पर राजनीति, सामाजिक संगठन काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में दलित पैंथर ने काम किया है। सरकारी कामकाज में पहले से ही दलित शब्द का चलन नहीं है। अनुसूचित जाति लिखा जाता है, लेकिन आम लोगों के बीच व मीडिया में दलित शब्द का चलन रहा है। यह चलन कायम रहना चाहिए। दलित का मतलब कतई अपमानजनक नहीं है। सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक तौर पर पिछड़े लोगों को दलित कहा जाता रहा है। इसमें मेहनतकश मजदूर, सफाई कर्मचारी व गरीबों का समावेश है।

मुंबई से चुनाव लड़ूंगा
आठवले ने कहा कि वे दक्षिण-पश्चिम मुंबई से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा भी की है। भाजपा व शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए। वे साथ नहीं आए, तो अकेले ही चुनाव लड़ा जाएगा। आरपीआई राज्य में महायुति के तहत कम से कम 2 स्थानों पर लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार है। एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि शहरी नक्सल के आरोप में फिलहाल जो 5 आरोपी पकड़े गए, वे आंबेडकरवादी नहीं हैं। नक्सल विरोध कार्रवाई में आंबेडकरवादियों पर अन्याय नहीं होना चाहिए।