बीमित का आरोप: बीमा अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा गोलमाल: शुगर की बीमारी का हवाला देकर चोला मंडलम इंश्योरेंस कंपनी ने भुगतान देने से किया इनकार

July 23rd, 2022

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बीमारी कोई भी हो नियमानुसार क्लेम देने का वादा बीमा कंपनी करती है, पर जब जरूरत पड़ती है तो सारे वादों की पोल खुलकर सामने आ जाती है। बीमा कंपनी अपने लिंक अस्पताल में भी कैशलेस नहीं कर रही है और जब पॉलिसीधारक बीमा कंपनी में सारे दस्तावेजों के साथ बिल सबमिट करते हैं तो सर्वेयर टीम के साथ क्लेम डिपार्टमेंट के अधिकारी इस तरह पॉलिसीधारक पर धावा बोल देते हैं, जैसे की उसने बीमा कंपनी की पॉलिसी लेकर अपराध कर दिया हो। अनेक क्वेरी के साथ लंबे समय तक चक्कर लगवाना व मेल का जवाब नहीं देना जैसे अनेक प्रकार से परेशान करने का सिलसिला बीमा कंपनी के द्वारा शुरू कर दिया जाता है और फिर अचानक बीमा कंपनी सारे दस्तावेजों को झूठा बताकर या फिर पुरानी बीमारी का हवाला देकर नो क्लेम करने का लैटर ग्राहकों के घरों में भेज देती है। अब तो बीमित कंपनी प्रबंधकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग प्रशासन से कर रहे हैं।

इन नंबरों पर बीमा से संबंधित समस्या बताएँ 

इस तरह की समस्या यदि आपके साथ भी है तो आप दैनिक भास्कर के मोबाइल नंबर -9425324184, 9425357204 पर बात करके प्रमाण सहित अपनी बात दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक रख सकते हैं। संकट की इस घड़ी में भास्कर द्वारा आपकी आवाज को खबर के माध्यम से उचित मंच तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

लीवर में सूजन आने पर भर्ती हुआ था बीमित

रीवा जिले की सगरा पोस्ट निवासी राजेश चतुर्वेदी ने शिकायत में बताया कि ससुर रावेन्द्र पाठक द्वारा चोला मंडलम से हेल्थ पॉलिसी कराई गई थी। पॉलिसी क्रमांक 2890000947400000 का कैशलेस कार्ड भी बीमा कंपनी के द्वारा दिया गया था। पेट में दर्द होने के कारण रावेन्द्र को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ पर चैक करने के बाद डॉक्टर ने बताया कि लीवर में सूजन है। 21 जून 2022 से लगातार इलाज चला और इसी बीच शुगर की जाँच हुई तो चैकअप में शुगर की बीमारी का खुलासा हुआ। बीमा कंपनी के लिंक अस्पताल में कैशलेस के लिए मेल किया गया तो बीमा कंपनी ने इनकार कर दिया। कंपनी के द्वारा बिल सबमिट करने पर भुगतान का वादा किया गया था। रावेन्द्र के द्वारा ऑनलाइन व ऑफलाइन बिल सबमिट किया गया तो बीमा अधिकारियों ने अनेक प्रकार की क्वेरी निकाली। अस्पताल से सब कुछ सत्यापित कराकर दिया गया तो बीमा कंपनी ने यह कहते हुए बिल रिजेक्ट कर दिया की आपको शुगर है, इसलिए हम क्लेम नहीं दे सकते हैं। बीमित का आरोप है कि जब इंश्योरेंस कराया था उस वक्त शुगर नहीं थी और किसी तरह की पुरानी हिस्ट्री नहीं, उसके बाद भी बीमा अधिकारियों के द्वारा भटकाया जा रहा है, जबकि क्लेम पेट के इलाज का है और हमारे द्वारा शुगर के इलाज का क्लेम नहीं किया गया है।
 

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