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छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भुगतान के संबंध में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का स्पष्टीकरण

November 18th, 2020 15:41 IST
छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भुगतान के संबंध में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का स्पष्टीकरण

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भुगतान के संबंध में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का स्पष्टीकरण कुछ समाचार लेखों ने उल्लेख किया है कि कोविड-19महामारी के कारण छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भुगतान में अधिक विलम्ब हो रहा है और इस कारण छात्रों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस खबर पर तथ्यों के बारे में स्थिति को स्पष्ट करने के लिए, यह सूचित किया जाता है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग अनुसूचित जातियों/अन्य पिछड़े वर्गों, अधिसूचित जनजातियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों जैसे लक्षित समूहों के लिए राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन/विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रत्यक्ष रूप से लागू करता है। विभाग ने कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भुगतान के दिशा-निर्देशो का कठोरता से पालन किया है ताकि लाभार्थियों को विशेष रूप से कोविड-19के इस संकट के दौरान किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। विभाग ने अनुसूचित जातियों के छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद की छात्रवृत्ति की प्रमुख योजना के तहत, जून, 2020तक सभी संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्वानुमानित मांग के आधार पर 75 प्रतिशत की केंद्रीय हिस्सेदारी पहले ही जारी कर दी है। भिन्न-भिन्न मामलों के आधार पर केंद्रीय हिस्से की 25प्रतिशत की शेष राशि को जारी करने की भी मंजूरी दे दी गई है। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को छात्रवृत्ति आवेदनों की निस्तारण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है ताकि छात्रों को किसी भी कठिनाई का सामना न करना पड़े। विभाग की अन्य सभी योजनाओं में, कार्यान्वयन एजेंसियों को नियमित आधार पर धनराशि जारी की जा रही है| संबंधित अधिकारियों के साथ इस प्रक्रिया की दिन-प्रतिदिन के आधार पर निगरानी भी की जा रही है। अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप की योजना के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को फैलोशिप के वितरण की निगरानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अन्य हितधारकों के साथ मासिक आधार पर की जाती है। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा कार्यान्वयन एजेंसियों को योजना के तहत छात्रों को फैलोशिप के समय पर वितरण को सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।