टोटा: कोराड़ी प्लांट में मात्र 2 दिन का कोयला, हर दिन 33500 टन कोयले की जरूरत

March 1st, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर। औष्णिक विद्युत केंद्र कोराड़ी में फिलहाल 4 यूनिट में बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसमें 210 मेगावॉट का एक और 660 मेगावॉट की 3 यूनिट हैं। हर दिन करीब 33500 टन कोयले की जरूरत होती है। जानकारी के अनुसार,  660 मेगावॉट वाली 3 यूनिट के लिए मात्र दो दिन का ही कोयला बचा हुआ है। समय पर कोयले की आपूर्ति नहीं हुई तो बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। गर्मी के दिनों में बिजली की मांग बढ़ जाती है। राज्य में महावितरण के माध्यम से वर्तमान में 21 हजार मेगावॉट  बिजली का कंज्म्प्शन हो रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही इसमें और इजाफा हो सकता है। कृषि उपभोक्ताआें पर 45 हजार करोड़ से ज्यादा का बिल बकाया है। कृषि बिल की वसूली में हो रही देरी के कारण महावितरण की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। कोराड़ी केंद्र में वेकोलि, एसईसीएल व एमसीएल से कोयले की आपूर्ति होती है। कोयले की मांग का पत्र मुख्यालय के मार्फत संबंधित एजेंसी को भेजा गया है। 

ऊर्जा मंत्री डा. नितीन राऊत ने कृषि बिल की बकाया राशि की वसूली नहीं होने पर कोयले का संकट खड़ा होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि कोयले की खरीदारी के लिए पैसे चाहिए और कृषि बिल की वसूली नहीं होने से बिजली कंपनी आर्थिक संकट में है। आर्थिक संकट जारी रहा तो कोयला खरीदना मुश्किल हो सकता है आैर इसका असर बिजली वितरण पर हो सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि कोयले का स्टॉक काफी कम है। बिजली का संकट खड़ा न हो, इसलिए कृषि बिल भरने का आह्वान किया। 

कोयले की डिमांड भेज दी है : औष्णिक विद्युत केंद्र काेराड़ी के सूत्रों ने बताया कि यहां बस उतना ही कोयला बचा है, जो 660 मेगावॉट के यूनिटों में 2 दिन व 210 मेगावॉट  के यूनिट में 4-5 दिन तक चल सकेगा। इस प्लांट में हर दिन करीब 33500 टन कोयले की जरूरत होती है। कोयले की डिमांड का पत्र संबंधित एजेंसी को भेज दिया गया है। अभी तक तो नियमित रूप से कोयले की आपूर्ति हुई। आगे क्या होगा, इस बारे में नहीं कहा जा सकता। कोयले के बगैर काम नहीं चल सकेगा।

 

 

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