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टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी में घमासान, खडसे और पाटील में जुबानी तलवारें खिचीं 

टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी में घमासान, खडसे और पाटील में जुबानी तलवारें खिचीं 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा के भीतर उभरी नाराजगी को लेकर घमासान तेज हो गया है। विधान परिषद का टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील के बीच आरोप- प्रत्यारोप शुरू हो गया है। बुधवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस के कहने पर पाटील मीडिया के सामने आए। पाटील ने खडसे पर पलटवार किया। इसके तुरंत बाद खडसे ने भी पाटील पर जवाबी हमला बोला।पाटील ने कहा कि खडसे के परिवार को भाजपा ने काफी कुछ दिया है। इसलिए खडसे अब पार्टी में वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक के रूप रहें। पाटील ने कहा कि खडसे को टिकट दिलाने के लिए मैंने और फडणवीस ने काफी प्रयास किया। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें टिकट नहीं दिया। हम भाजपा नेतृत्व से यह नहीं पूछ सकते हैं कि खडसे को टिकट क्यों नहीं दिया। पाटील ने कहा कि फडणवीस सज्जन आदमी हैं। इसलिए कुछ नहीं बोलते। फडणवीस अपने  छाती फाड़कर दिखाएं क्या कि उन्होंने खडसे के लिए प्रयास किया कि नहीं। पाटील ने कहा कि खडसे भी शीर्ष नेतृत्व के पास जाकर पता लगा सकते हैं। पाटील ने कहा कि शायद शीर्ष नेतृत्व ने सोचा होगा कि खडसे को 7 बार विधानसभा का टिकट दिया। भाजपा ने खडसे के बेटे को विधान परिषद का टिकट दिया । बेटे के निधन के बाद खडसे की बहू रक्षा खडसे को लोकसभा  चुनाव में उम्मीदवारी देने के लिए तत्कालीन सांसद हरिभाऊ जावले का टिकट काट दिया गया। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में खडसे को टिकट नहीं दिया गया। लेकिन उनकी बेटी रोहिणी खडसे को भाजपा ने टिकट दिया। खडसे की पत्नी मंदा खडसे महानंद की चेयरमैन हैं। हो सकता है पार्टी नेतृत्व ने इसलिए टिकट नहीं देने का फैसला किया होगा।

विधानसभा चुनाव हारने वाले को विधान परिषद में उम्मीदवारी नहीं

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पाटील ने कहा कि पंकजा मुंडे विधानसभा चुनाव हार गई थीं, इसलिए उन्हें विधान परिषद की उम्मीदवारी नहीं दी गई। क्योंकि पार्टी का निर्णय है कि विधान सभा चुनाव हारने वाले को विधान परिषद में नहीं भेजना है। पाटील ने कहा कि भाजपा उम्मीदवार गोपीचद पडलकर अपवाद हैं क्योंकि पडलकर ने विधानसभा का टिकट नहीं मांगा था। भाजपा ने ही उन्हें बारामती से चुनाव लड़ने को कहा था। पाटील ने कहा कि चंद्रशेखर बावनकुले टिकट नहीं मिलने के बाद भी शांत हैं लेकिन उन्हें भड़काने की कोशिश हो रही है। पाटील ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा के पास केवल 4 सीटें थी। इसलिए भाजपा की पूर्व विधायक मेधा कुलकर्णी को टिकट नहीं दिया जा सका। पाटील ने कहा कि विधान परिषद के उम्मीदवारों के हलफनामे के स्टैंप पेपर में मार्च महीने की तारीख इसलिए है क्योंकि स्टैंप पेपर जब खरीदा जाता है उसी दिन की तारीख होती है। 

पाटील को भाजपा का इतिहास नहीं पताः खडसे 

खडसे के परिवार वालों को लगातार टिकट देने के पाटील के बयान पर खडसे ने जवाब दिया है। खडसे ने कहा कि पाटील को भाजपा का इतिहास पता नहीं है। उनके मंत्री बनने से पहले उनका भाजपा में प्रवेश हुआ है। इसलिए पाटील को पहले भाजपा में टिकट देने और काटने का इतिहास जान लेना चाहिए। खडसे ने कहा कि मेरे परिवार में से केवल मुझे और मेरी बहू व सांसद रक्षा खडसे को टिकट मिला था। जिसमें से साल 2019 के विधानसभा चुनाव में मेरा टिकट काट दिया गया। इसके अलावा मेरे परिवार को महानंद में जो पद मिला है वह सहकारी संस्था का है। उससे भाजपा का कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं है। खडसे ने कहा कि पाटील कह रहे हैं कि मेरी बेटी रोहिणी खडसे को टिकट दिया था। लेकिन मैंने रोहिणी के लिए टिकट मांगा ही नहीं था। मेरा टिकट काटने से पार्टी का नुकसान न हो। इसलिए रोहिणी को बिना मांगे टिकट दिया गया था। खडसे ने कहा कि भाजपा नेता फडणवीस के पिता गंगाधरराव फडणवीस विधायक थे। फडणवीस खुद चार बार विधायक और मुख्यमंत्री रहे। उनकी चाची शोभाताई फडणवीस 24 साल विधायक रहीं और उन्हें मंत्री पद भी मिला था। पाटील को फडणवीस के घर का परिवारवाद नजर नहीं आता। केंद्रीय राज्य मंत्री रावसाहब दानवे भाजपा के सांसद हैं उनके बेटे संतोष दानवे विधायक हैं। भाजपा के विधायक राधाकृष्ण विखे पाटील के बेटे सुजय विखे पाटील सांसद हैं। राज्य में भाजपा के 10 से 12 नेताओं के परिवार में दो-दो पद हैं। खडसे ने कहा कि मैंने पार्टी के लिए 40 साल काम किया। इसलिए पार्टी से मुझे जो मिला मेरे मेहनत और संघर्ष के बल पर मिला है। 

कोरोना संकट के बाद कांग्रेस में आएगा भूकंप

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने दावा किया है कि कोराना संकट खत्म होने के बाद कांग्रेस के भीतर महाराष्ट्र और राष्ट्रीय स्तर पर भूचाल आने वाला है। खडसे को कांग्रेस की ओर से ऑफर मिलने पर पाटील ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को पहली अपनी पार्टी संभालना चाहिए। पाटील ने कहा कि खडसे को संभालना आसान नहीं है। कोरोना संकट के बाद कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर तीन भूंकप आएगा। इसमें कांग्रेस के दो युवा और एक वरिष्ठ वेता नेता भाजपा शामिल होंगे। 

खडसे की अवहेलना देखी नहीं जा रही, उनके लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले- थोरात 

दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहब थोरात ने कहा कि खडसे के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं। उनका पार्टी में स्वागत है। थोरात ने कहा कि भाजपा के भीतर खडसे की हो रही अवहेलना हमसे देखी नहीं जा रही है। विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की ओर से खडसे को उम्मीदवारी देने के सवाल पर थोरात ने कहा कि हमारी ओर से उन्हें कहा गया था कि कभी आपकी अपेक्षा होगी तो कांग्रेस आपके लिए खड़ी है। थोरात ने कहा कि खडसे बहुजन समाज के जनाधार वाले नेता हैं। लेकिन भाजपा में बहुजन समाज के प्रभावशील नेताओं का प्रभाव ज्यादा न बढ़ने पाए। इसका ध्यान भाजपा में रखा जाता है। थोरात ने कहा कि कोई भी दल खडसे जैसे समर्थ नेता को अपने करीब लाने का प्रयास करेगा। थोरात ने कहा कि खडसे कह रहे हैं कि भाजपा में लोकतंत्र नहीं बचा है। लेकिन भाजपा में रहने के बावजूद उन्हें देरी से यह बात समझ में आई। थोरात ने कहा कि मैंने भाजपा नेता पंकजा मुंडे से कोई बात नहीं की है। इसलिए मैंने उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन भाजपा में जो नेता दरकिनार कर दिए गए हैं उन्हें खुद ही समझना चाहिए कि उनको लेकर पार्टी के भीतर और आरएसएस की क्या रणनीति है। 

ठगे से रहे गए इच्छुक उम्मीदवार, नागपुर में होंगे 20 एमएलए

एमएलए मतदाताओं से जुड़ी 9 सीटों के लिए निर्विरोध चुनाव तय हो गया है। इस चुनाव में लगभग सभी दलों में उम्मीदवारी पाने के इच्छुकाें की संख्या अधिक थी। ज्यादातर की उम्मीदों  पर पानी फिरा है। खासकर वे नेता ठगे से महसूस कर रहे हैं जिनका नाम पार्टी में वरिष्ठ स्तर पर चल रहा था। नागपुर में ऐसे इच्छुकों की संख्या कम है। लेकिन नाराजगी तो है। बहरहाल भाजपा के लिहाज से खुशी की बात है कि उन्हें शहर में एक और विधायक मिल रहा है। शहर अध्यक्ष प्रवीण दटके के विधानपरिषद सदस्य बनने के साथ ही जिले में विधायकों की संख्या 20 हो जाएगी। 

बावनकुले चर्चा में 

इस चुनाव को लेकर आरंभ से ही पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले चर्चा में रहे। लेकिन उम्मीदवारों के नाम घोषित होने के बाद उनकी और अधिक चर्चा हुई। कहा जाता रहा कि भाजपा ने राज्य से जिन तीन प्रमुख पूर्व मंत्रियों को विधानपरिषद में भेजने के लिए दिल्ली की ओर नाम बढ़ाए थे उनमें बावनकुले शामिल थे। बावनकुले को उम्मीदवार नहीं बनाया गया। उसके बाद से वे निजी तौर पर चर्चा से हट गए। जिस दिन भाजपा के 4 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हुई उस दिन बावनकुले कोराडी में रहकर भी अपने समर्थकों से फोन पर भी संपर्क नहीं कर रहे थे। संवाद माध्यमों में उनके नाम की चर्चा होती रही। पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए बार बार बावनकुले का नाम  लिया। लेकिन पार्टी में उनके नाम पर फिर से चर्चा नहीं हुई। उधर बुधवार को ही संवाद माध्यम से चर्चा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने अवश्य कहा है कि बावनकुले के साथ अन्याय हुआ है। उन्हें उम्मीदवारी मिलना था। राज्य के नेताओं की भावना को केंद्रीय स्तर पर रखेंगे। खास बात है कि लाकडाऊन लागू होने के बाद से जिले में प्रशासनिक व्यवस्था व अन्य मामलों को लेकर बावनकुले लगभग हर दिन संवाद माध्यम से जुड़े रहे लेकिन विधानपरिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद से वे स्वयं को चर्चा से बाहर रखे हुए हैं। 

कांग्रेस में दबी रह गई भावना

कांग्रेस में भी स्थानीय स्तर के नेताओं की भावना दबी रह गई। उम्मीदवार नहीं बन पाने को लेकर नाराज हैं लेकिन किसी से कुछ कह भी नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस ने पहले दो उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। फिर एक उम्मीदवार को मैदान में रखा। कुछ नेता अवश्य कह रहे हैं कि पार्टी की विवशता को समझा जाना चाहिए। लेकिन नाराजगी कायम है। कांग्रेस ने जिस राजेश राठोड को उम्मीदवार बनाया है उसे लेकर कहा जा रहा है कि कम से कम किसी 
ऐसे नेता को मौका दिया जाना चाहिए था जो प्रदेश राजनीति में सक्रिय हो। इन नामों में कांग्रेस के दो प्रदेश प्रवक्त सचिन सावंत व अतुल लोंढे का नाम भी चर्चा में रहा है। उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद सावंत ने कुछ समय तक सोशल मीडिया से अपने नाम के साथ प्रवक्ता शब्द हटा दिया था। कहा जाता रहा कि लोंढे भी नाराज रहे। लोंढे नागपुर में कांग्रेस के अध्ययनशील नेता की पहचान बना रहे हैं। मनपा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव में पूर्व नागपुर में पार्टी की ओर से उन्हें उम्मीदवार बनाने की उम्मीद पूरी नहीं हो पायी है। 

20 विधायक 

बहरहाल, प्रवीण दटके के विधानपरिषद चुने जाने पर जिले में विधायकों की संख्या 20 हो जाएगी। यहां 12 विधानसभा सदस्य हैं। विधानपरिषद सदस्यों में गिरीश व्यास, अनिल सोलेे, ना.गो गाणार, रामदास   आंबटकर,  परिणय फुके, प्रकाश गजभिये, जोगेंद्र कवाड़े शामिल है। इनमें भी सोले, गजभिये, कवाडे का कार्यकाल जल्द पूरा होनेवाला है। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।