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दहीहांडी पर कोरोना की मार, विधायक राम कदम ने रद्द किया उत्सव 

दहीहांडी पर कोरोना की मार, विधायक राम कदम ने रद्द किया उत्सव 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भाजपा विधायक राम कदम ने कोरोना संक्रमण के चलते इस साल भी दही हांडी उत्सव न मनाने का फैसला किया है। पिछले साल भी उन्होंने पश्चिम महाराष्ट्र में आई बाढ़ के चलते दहीहंडी का आयोजन नहीं किया था और आयोजन में लगने वाले पैसे बाढ़ पीड़ितों को दान कर दिए थे। घाटकोपर इलाके में किया जाने वाला आयोजन शहर के सबसे बड़े आयोजनों में से एक होता है लेकिन यहां होने वाली भारी भीड़ के चलते कदम ने इस बार आयोजन से कदम पीछे खींच लिए हैं।

आयोजन में बड़ी संख्या में सेलिब्रिटी जाते हैं और उन्हें देखने हजारों की संख्या में भीड़ जुटती हैं। दहीहंडी मुंबई के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है गोविंदाओं की टोली बनाकर युवा शहर भर में घूमते हैं और ऊंचाई पर लटकाए गए हंडिया तोड़ते हैं जिसके बदले उन्हें इनाम मिलता है। यह ईनाम कई बार लाखों रुपयों का होता है। युवाओं में त्यौहार की लोकप्रियता को देखते हुए बड़ी संख्या में राजनेता भी इसका आयोजन करते हैं। 

वरली इलाके में सचिन अहिर के संकल्प प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दहीहंडी की भी खूब चर्चा होती है। ठाणे में  आयोजित किए जाने वाले  राकांपा नेता और मौजूदा गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड के  संघर्ष प्रतिष्ठान दहीहंडी उत्साव और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक द्वारा आयोजित संस्कृति युवा प्रतिष्ठान दही हांडी भी सुर्खियों में रहते है। मुंबई, ठाणे और आसपास के इलाकों में सैकड़ों छोटे बड़े आयोजन होते हैं।

फिलहाल दूसरे आयोजकों ने अपना रुख साफ नहीं किया है लेकिन ऐसा लगता है कि कोरोना संक्रमण के चलते मुंबई में इस बार दही हांडी उत्सव खटाई में पड़ सकता है।  वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गणेशोत्सव उत्सव को लेकर भी लोगों से अपील की है कि वे इस बार सामान्य रूप से ही उत्सव मनाएं।

गोविंदाओं में भी निराशा

साल 2010 में 43.79 फुट ऊंचा 9 थर का मानव पिरामिड बनाकर अपने नाम विश्व रिकॉर्ड कराने वाले जय जवान गोविंदा पथक के अध्यक्ष और कोच संदीप धवणे ने बताया की आमतौर पर मंडल से जुड़े करीब 600 गोविंदा दहीहंडी के कुछ महीनों पहले से ही तैयारियां और प्रशिक्षण शुरू कर देते हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते बनाए गए सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की वजह से फिलहाल ट्रेनिंग संभव नहीं है। धवणे ने कहा कि आगे क्या करना है इसे लेकर फिलहाल असमंजस है, अगले कुछ दिनों में परिस्थिति देखते हुए उत्सव में हिस्सा लेने की बाबत फैसला लेंगे। बता दें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन दहीहंडी उत्सव मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी 11 अगस्त को है। धवणे ने कहा कि फिलहाल मंडल से जुड़े लोग निसर्ग चक्रवात के चलते कोकण किनारपट्टी पर नुकसान उठाने वाले लोगों की मदद में जुटे हुए हैं।  

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