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कोरोना : महाराष्ट्र में एक लाख के पार, औरंगाबाद में 94, अकोला में 59, अमरावती में 7, यवतमाल में 5, वर्धा और गड़चिरोली में 1-1 पॉजिटिव

कोरोना : महाराष्ट्र में एक लाख के पार, औरंगाबाद में 94, अकोला में 59, अमरावती में 7, यवतमाल में 5, वर्धा और गड़चिरोली में 1-1 पॉजिटिव

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक लाख पार पहुंच गई है। राज्य में कोरोना वायरस से 1 लाख 1 हजार 141 मरीज संक्रिमत हो गए हैं। शुक्रवार को कोरोना के 3493 नए मरीज मिले। जबकि 127 मरीजों की मौत हो गई। वहीं 1718 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि राज्य में 49 हजार 616 कोरोना के एक्टिव केस हैं। 47 हजार 796 मरीज कोरोना से ठीक हो चुके हैं। कोरोना के कारण 3717 मरीजों की मौत हुई है जबकि 12 मरीजों की मृत्यु अन्य कारणों से हुई है। राज्य भर में कोरोना के मरीजों का ठीक होने का प्रमाण 47.3 प्रतिशत है जबकि मृत्यु दर 3.7 प्रतिशत है। टोपे ने बताया कि शुक्रवार को मुंबई में 90, ठाणे में 11, कल्याण डोंबिवली में 3, वसई-विरार में 1, मीरा भाईंदर में 1, नाशिक में 2, धुलिया में 1, पुणे में 12, सांगली में 3, औरंगाबाद में 2 और अमरावती में 1 मरीज की मौत हुई है। टोपे ने बताया कि नागपुर में 969 मरीजों में से 421 एक्टिव केस हैं। औरंगाबाद में 2457 मरीजों में से 972 एक्टिव केस और अकोला में 979 मरीजों में से 433 एक्टिव केस है।

औरंगाबाद में मिले 94 संक्रमित

औरंगाबाद जिले में शुक्रवार को कुल 94 कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसके चलते अब तक कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़कर 2524 हो गई है। कुल 1363 लोगों ने इसपर जीत पा ली है और सक्रिय 1033 मरीजों का इलाज जारी है। कोरोना के विषाणुओं ने 128 लोगों की जान ली है।

अकोला में 59 नए पॉजिटिव, एक की मौत

अकोला जिले में 59 नए मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके साथ ही जिले में कुल पाजिटिव मरीजों की संख्या 973 हो गई है। इस दौरान गुरुवार को बालापुर के 78 वर्षीय पुरुष मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 44 हो गया है। इसमें एक मरीज ने आत्महत्या की थी, जो कि कोरोना से पीड़ित था। गुरुवार रात को बालापुर के एक 78 वर्षीय पुरुष मरीज की मौत हुई। 7 जून को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। जिले में कुल 44 मौतें हुई हैं।

अमरावती में मिले सात और पॉजिटिव

उधर अमरावती जिले में शुक्रवार की शाम पांच बजे तक आठ नए कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए जाने से अब यहां संक्रमितों की संख्या 312 हो चुकी है। इसी के साथ बडनेरा व अकोली नए कोरोना हॉटस्पॉट के रूप में उभरकर सामने आए हैं। अब तक अमरावती में पाए गए संक्रमण के कुल 312 में से 17 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं 235 मरीज स्वस्थ्य होकर अपने घर लौटे हैं। इसके अलावा 60 मरीजों का उपचार चल रहा है। जिनमें 56 मरीजों का अमरावती के जिला कोविड अस्पताल तथा 4 मरीजों का नागपुर के जीएमसी में उपचार चल रहा है। 

यवतमाल में 5 नए मरीज 

शुक्रवार को यवतमाल जिले में कोरोना के 5 नए मरीज पाए गए। इसी के साथ यवतमाल में कुल संक्रमितों की संख्या 167 हो गई है। इनमें से 24 आईसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं जबकि 141 मरीज उपचार के बाद ठीक होकर घर गए हैं। दो की कोरोना से मौत हो चुकी है। 

वर्धा और गड़चिरोली में एक-एक पॉजिटिव

विदर्भ के वर्धा जिले में गुडग़ांव से आए 65 वर्षीय वृद्ध शुक्रवार को कोरोना से संक्रमित पाया गया। दूसरी ओर दिल्ली से गड़चिरोली जिले की धानोरा तहसील में पहुंची एक 19 वर्षीय युवती की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। 

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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: योगी लोकप्रिय, फिर भी बीजेपी में क्यों है हार का डर, ये हैं 6 बड़े कारण

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: योगी लोकप्रिय, फिर भी बीजेपी में क्यों है हार का डर, ये हैं 6 बड़े कारण

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तरप्रदेश में अगले साल यानि कि 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव को लगातार दिलचस्प बना रहे हैं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती। अखिलेश यादव की सक्रियता यूपी में देखने लायक है। बहन मायावती भी अब मुख्य चुनावी धारा में वापसी के लिए बेचैन नजर आने लगी हैं। पर मौजूदा हालात को देखते हुए यही कयास हैं कि बीजेपी की ही वापसी होगी। और संभवतः योगी आदित्यनाथ ही बीजेपी का चेहरा भी होंगे। इस चुनाव से पहले बीजेपी राम मंदिर मुद्दे को भी खत्म कर चुकी है। जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। उसके बावजूद बीजेपी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं बताई जाती। उसकी कुछ ये बड़ी वजह नजर आती हैं-

पूर्वांचल में पुराने साथियों का छूटना

2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल फतह करने के लिए बीजेपी एक नए फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरी थी। बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में उन छोटे राजनीतिक दलों के साथ में गठबंधन किया, जिनका अपना जातिगत वोटबैंक है। इसी फॉर्मूले का फायदा बीजेपी को मिला और बीजेपी को 2017 के विधानसभा चुनाव में 28 जिलों की 170 सीटों में से 115 सीटें मिली थीं। यह नंबर सच में करिश्माई थे लेकिन इस आंकड़े को अकेले बीजेपी ने अपने दम पर हासिल नहीं किया था। उसकी मदद इन छोटे राजनीतिक दलों से जुड़े उनके जातिगत वोटबैंक ने की थी। आइये समझते है पूर्वांचल में इन छोटे राजनीतिक दलों की ताकत जो किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं। 

suhail

सपा का गठबंधन  

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है कुछ ऐसा ही हाल अखिलेश यादव का है। 2019 में बसपा का साथ लेकर सपा को जो नुकसान हुआ था। उसके बाद अब अखिलेश 2022 के लिए छोटे छोटे दलों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। सपा ने राष्ट्रीय लोकदल, संजय चौहान की जनतावादी पार्टी और केशव मौर्या की महान दल के साथ में गठबंधन कर लिया है। 

mahan


बनारस, मथुरा, अयोध्या में सपा की बल्ले बल्ले

जिला पंचायत चुनाव में भले ही बीजेपी ने बाजी मारी हो। पर कुछ नतीजे बीजेपी के लिए भी चौंकाने वाले थे। क्योंकि पार्टी को उन जगहों पर झटका लगा था जहां बिलकुल उम्मीद नहीं थी। अयोध्या में मंदिर मसला हल होने का फायदा जिला पंचायत चुनाव के नतीजों में नजर नहीं आया। यहां समाजवादी पार्टी का दबदबा दिखाई दिया। कमोबेश यही नतीजे बनारस और मथुरा में नजर आए। बता दें बनारस पीएम नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट है। 

ayodhya

किसान आंदोलन

देश में किसान पिछले 8 महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश की सियासत पर देखने को मिल रहा है। किसान आंदोलन का सबसे अधिक असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाट लैंड कहा जाता है, यहां पर एक कहावत कही जाती है कि 'जिसका जाट उसके ठाठ'। इसकी एक वजह यह है कि चौधराहट करने वाले इस समाज के निर्णय से कई जातियों का रुख तय होता है। किसान आंदोलन से यही जाट बीजेपी से खिसकते नजर आ रहे हैं।

kisan

ब्राह्मणों की नाराजगी 

साल 2017 में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की तो राजपूत समुदाय से आने वाले योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। यही वजह है कि योगी सरकार में राजपूत बनाम ब्राह्मण के विपक्ष के नैरेटिव के मद्देनजर ब्राह्मण वोटों का अपने पाले में जोड़ने के लिए बसपा से लेकर सपा और कांग्रेस तक सक्रिय है।  विकास दुबे और उसके साथि‍यों के एनकाउंटर के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में योगी अदित्यनाथ की सरकार में  ब्राह्मणों पर अत्याचार बढ़ने का आरोप लगाया था। ब्राह्मण बुद्धिजीवियों का आरोप है कि एकतरफा समर्थन के बावजूद सरकार में ब्राह्मणों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से किनारे कर दिया गया है। 

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मोदी बनाम योगी!

मोदी और योगी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में मोदी बनाम योगी को लेकर काफी चर्चाएं हैं। इन चर्चाओं ने ऐसे ही जन्म नहीं लिया है, इनके पीछे कुछ ठोस वजह हैं। हालांकि बीजेपी ने हर बार यही जाहिर किया है कि पार्टी के अंदर ऐसी कोई कलह नहीं है।

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।