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 निगम प्रशासन ने ध्वस्त कराए 3 एकड़ शासकीय भूमि पर बने 3 भवन

 निगम प्रशासन ने ध्वस्त कराए 3 एकड़ शासकीय भूमि पर बने 3 भवन

डिजिटल डेस्क सतना। नगर निगम प्रशासन ने पुलिस लगाकर यहां प्रेमनगर में तकरीबन 3 एकड़  बने 3 भवन ध्वस्त करा दिए। इन तीनों भवनों में 35कमरे थे। उल्लेखनीय है, 17 वर्ष से झगड़े की जड़ रही नजूल की इस 3.40 एकड़  जमीन (खसरा नम्बर 374/504/01) और उस पर अनाधिकृत तौर पर बने कमला नेहरु महिला महाविद्यालय , लॉ कालेज, वीएमवी कॉलेज, जनता स्कूल और सिटी मांटेसरी स्कूल भवन के साथ रिक्त भूमि को हाल ही में शासन के पक्ष में राजसात करते हुए जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर डा.सतेन्द्र सिंह ने भूमि संबंधी आधिपत्य नगर निगम को सौंप दिया था।   
बैक डोर से घुसे और आ गए फ्रंट पर 
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि निगम के स्वामित्व में बने निजी भवनों को ध्वस्त करने की रणनीति के तहत 2 अक्टूबर का दिन तय किया गया। दोपहर 2 बजे के करीब एसडीएम पीएस त्रिपाठी, सिटी मजिस्ट्रेट संस्कृति शर्मा और सीएसपी विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में अमला परिसर के बैक डोर से अंदर घुसा। अमले में  निगम के कार्यपालन यंत्री अरुण तिवारी, उपयंत्री मुकेश चतुर्वेदी, रोजल प्रताप सिंह, दीपक बागरी और अतिक्रमण प्रभारी अनिल श्रीवास्तव के अलावा 40 श्रमिक और सफाई कर्मी भी शामिल थे। अमला 4 जेसीबी, एक हाइड्रा और 6 डंपर से भी लेस था। एहतियात के तौर पर सिटी कोतवाली और सिविल लाइन थाने से भारी पुलिस बल बुलाया गया था। अंदर तोड़ फोड़ शुरु होते ही परिसर के मेनगेट पर पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। देर रात  तक परिसर की सभी संरचनाओं को तोड़कर उसे मैदान में तब्दील करने का काम जारी था। बताया गया है कि कार्रवाई किए जाने से पहले बंद कमरों के ताले तोड़े गए और उसमें मौजूद फर्नीचर तथा अन्य सामान संबंधितों को बाकायदा सुपुर्द कर दिया गया। 
क्या है पूरा मामला 
वर्ष 1992 में नजूल तहसीलदार ने नजूल की 3.40 एकड़ जमीन (खसरा नम्बर 374/504/01) पर विजय शंकर शिक्षा समिति के दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट व्यवस्था दी थी कि चंूकि इस शासकीय भूमि पर वृद्धाश्रम प्रस्तावित है अत: इसे नगर निगम के सुपुर्द  किया जाए। आदेश का पालन नहीं होने पर वर्ष 2006 में इसी भूमि पर बने कालेज और स्कूल भवन के निर्माणों को तबके के नजूल तहसीलदार ने अतिक्रमण घोषित कर दिया। शिक्षा समिति ने अंतत: राजस्व बोर्ड के समक्ष दावा पेश किया लेकिन यहां भी उसे सफलता नहीं मिली। बोर्ड के फैसले के विरुद्ध दावा हाईकोर्ट में पेश किया गया। मगर विगत 22 जुलाई को हाईकोर्ट ने भी नजूल तहसीलदार के फैसले को ही प्रभावी रखा। हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत मौजूदा नजूल तहसीलदार शैलेन्द्र बिहारी शर्मा ने कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा और कलेक्टर ने  17 वर्ष से झगड़े की जड़ रही नजूल की जमीन के स्कूल और कालेज भवनों को राजसात करते हुए स्वामित्व नगर निगम को सौंप दिया। निगम ने मौके पर अपने स्वामित्व संबंधी बोर्ड भी लगा दिए थे।   
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।