दैनिक भास्कर हिंदी: बिजली बिलों में लाखों के भ्रष्टाचार का हुआ खुलासा, सीएम से शिकायत

November 19th, 2017

डिजिटल डेस्क, चंद्रपुर। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के चंद्रपुर कार्यालय के बिजली बिल में लाखों रुपए का भ्रष्टाचार होने की जानकारी सामने आई है। कार्यालय के प्रादेशिक अधिकारी पर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सांठगांठ कर गबन करने का आरोप लगा है। इस मामले की जांच कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अपराध दर्ज करने और सरकार के डुबोई गई राशि वसूल करने की मांग संजीवनी पर्यावरण सामाजिक संस्था के अध्यक्ष राजेश बेले ने की है। शनिवार को उन्होंने बताया कि RTI से जानकारी जुटाने के बाद मामला सामने आया है। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन भिजवाकर शिकायत की है।

RTI से मिली जानकारी
शिकायत की प्रतिलिपियां केंद्रीय गृहराज्यमंत्री हंसराज अहिर, पालकमंत्री सुधीर मुनगंटीवार, पर्यावरण मंत्री रामदास कदम और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मेंबर सेक्रेटरी को भेजी गई हैं।  सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल चंद्रपुर कार्यालय की ऊपरी मंजिल पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (कंटिव्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम) स्थापित किया है। अलग बिजली मीटर के लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय के प्रादेशिक अधिकारी को मीटर के लिए 9 अक्टूबर 2014 को 1 लाख 18 हजार 269 रुपए भरने को कहा गया। अधिकारी ने बिजली वितरण कार्यालय में 11 सितंबर 2014 को रकम भर दी, लेकिन उन्हें मीटर नहीं दिया गया।

निजी कंपनी को बिजली सप्लाई जोड़ी
मॉनिटरिंग स्टेशन की देखरेख के लिए ई-टेडरिंग से काम का ठेका एनवाइरोटेक ऑनलाइन इक्यूप्मेंट्स प्रा.लि. कंपनी को 6 से 7 वर्ष के लिए दिया गया है। इस कंपनी में महाराष्ट्र प्रदूषण महामंडल द्वारा भरी गई राशि के बाद भी महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रादेशिक अधिकारी पी.एन. जोशी ने मिलीभगत कर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय के बिजली मीटर से निजी कंपनी को बिजली सप्लाई जोड़ दी। ऐसा करने उन्होंने भ्रष्टाचार किया है। 

उजागार हुआ भ्रष्टाचार
बेले ने बताया एमपीसीबी के पुराने कार्यालय के बिजली बिलों पर गौर करें तो पहले 7 से 10 हजार तक का बिजली बिल आता था। नवंबर 2014 से नया कार्यालय उद्योग भवन में स्थानांतरित किया गया है। तब से महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय का बिल ज्यादा आने लगा है, क्योंकि जिस कार्यालय का बिजली बिल 7 से 10 हजार आता था, मात्र उस कार्यालय के प्रादेशिक अधिकारी ने एक निजी कंपनी को बिजली सप्लाय दिया है। जिससे भ्रष्टाचार की बात सामने आई है। पत्र परिषद में बताया कि 36 माह में 32 हजार से लेकर 1 लाख से अधिक तक रुपए का बिल आया है। 36 माह के बिजली बिल का खर्च 26 लाख 20 हजार 144 रुपए हुआ है। यह बात ध्यान में आते ही महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रादेशिक अधिकारी पी.एन. जोशी के खिलाफ अपराध दर्ज कर संपूर्ण राशि की भरपाई वसूलने, भ्रष्टाचार की जांच कर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही उनकी संपत्ति की जांच करने की मांग उन्होंने की पत्र परिषद में संस्था के उपाध्यक्ष नितीन गाडग़े, अमित जांभुलकर, अभी वांढरे, संदीप तोडसाम आदि उपस्थित थे।


बेले ने बताया एमपीसीबी के पुराने कार्यालय के बिजली बिलों पर गौर करें तो पहले 7 से 10 हजार तक का बिजली बिल आता था। नवंबर 2014 से नया कार्यालय उद्योग भवन में स्थानांतरित किया गया है। तब से महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय का बिल ज्यादा आने लगा है, क्योंकि जिस कार्यालय का बिजली बिल 7 से 10 हजार आता था, मात्र उस कार्यालय के प्रादेशिक अधिकारी ने एक निजी कंपनी को बिजली सप्लाय दिया है। जिससे भ्रष्टाचार की बात सामने आई है। पत्र परिषद में बताया कि 36 माह में 32 हजार से लेकर 1 लाख से अधिक तक रुपए का बिल आया है। 36 माह के बिजली बिल का खर्च 26 लाख 20 हजार 144 रुपए हुआ है। यह बात ध्यान में आते ही महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रादेशिक अधिकारी पी.एन. जोशी के खिलाफ अपराध दर्ज कर संपूर्ण राशि की भरपाई वसूलने, भ्रष्टाचार की जांच कर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही उनकी संपत्ति की जांच करने की मांग उन्होंने की पत्र परिषद में संस्था के उपाध्यक्ष नितीन गाडग़े, अमित जांभुलकर, अभी वांढरे, संदीप तोडसाम आदि उपस्थित थे।