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ट्रेन में हुई प्रसव पीड़ा, नागपुर में दी मेडिकल सहायता

ट्रेन में हुई प्रसव पीड़ा, नागपुर में दी मेडिकल सहायता

डिजिटल डेस्क, नागपुर। एक महिला को ट्रेन में प्रसव पीड़ा होने की कंट्रोल रूम में सूचना मिलते ही महिला को नागपुर स्टेशन पर उतारा गया और उसे अस्पताल मंे भर्ती कराया गया। शुक्रवार को महिला ट्रेन संख्या 12590 सिकंदराबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस-6 में सीट नंबर-9 पर यात्रा कर रही थी। उसके साथ रिश्तेदार भी थे। शाम को अचानक महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। रिश्तेदारों ने यह जानकारी ट्रेन मंे मौजूद रेलवे स्टॉफ को दी। स्टॉफ ने तुरंत यह जानकारी नागपुर कंट्रोल रूम तक पहुंचाई। नागपुर रेलवे स्टेशन के उप-अधीक्षक अतुल श्रीवास्तव को सूचना मिलते ही उन्होंने यह जानकारी रेलवे अस्पताल को दी। पश्चात ट्रेन नागपुर पहुंचने के पूर्व ही रेलवे अस्पताल से एम्बुलेंस, महिला डॉक्टर और अन्य सहायता स्टेशन पर पहुंच गई। ट्रेन शाम 5 बजकर 11 मिनट पर नागपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची। महिला को ट्रेन से उतारा गया और उसे तुरंत इलाज के लिए रेलवे अस्पताल पहुंचाया गया।

खापरी-अजनी क्राॅसिंग गेट बंद

उधर  मध्य रेल नागपुर मंडल के खापरी-अजनी  के बीच लेवल क्रॉसिंग गेट नंबर 120/स्पेशल 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक 22.00 बजे से सुबह 06.00 बजे तक अस्थायी तौर पर ट्रैक मैंटेनेंस कार्य के कारण यातायात के लिए बंद रहेगा।


देवलापार में गैस सिलेंडर की किल्लत

वहीं प्रदूषण से मुक्ति और पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार ने अनेक योजनाओं के तहत अनेक परिवार को गैस कनेक्शन वितरित किए हैं। इस योजना का अनेक परिवार ने लाभ लिया लेकिन, इस क्षेत्र के उपभोक्ताओं को करीब 15 से 20 दिनों से सिलेंडर न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल से देवलापार में भारत गैस कंपनी का कार्यालय है। करीब तीन हजार उपभोक्ताओं ने गैस कनेक्शन ले रखे हैं। यानी इस क्षेत्र के 90 प्रतिशत परिवार ने कनेक्शन लिया है लेकिन पिछले 15 से 20 दिनों से इन्हें इस कार्यालय के चक्कर काटना पड़ रहा है।  फिर भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। कार्यालय के संचालक का कहना है कि, हमें नागपुर बूटीबोरी गैस कंपनी से भारत गैस के भरे सिलेंडर उपलब्ध होते हैं। पिछले कुछ दिनों से किसी कारण के चलते हमें भरे सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। जल्द ही भरे सिलेंडर मिलने की जानकारी है। जैसे ही मिलेंगे हम सुचारु रूप से सेवा देंगे। वर्तमान में इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में केरोसिन भी नहीं मिल रहा है। ऐसी परिस्थिति के चलते एक ही उपाय सदियों से चला आ रहा है। वह उपाय है लकड़ियों को ईंधन के रूप मे इस्तेमाल करना। वर्तमान स्थिति की मजबूरी देखते हुए यही एक विकल्प आम नागरिकों के पास रह गया है। अब देखना यह है कि, यह मजबूरी कब तक चलती है।
 

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