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अपना कर्तव्य समझ कर अनुबंध के तहत ड्यूटी करें डॉक्टर - हाईकोर्ट

अपना कर्तव्य समझ कर अनुबंध के तहत ड्यूटी करें डॉक्टर - हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना संकट के बीच बांड (अनुबंध) के तहत अपनी एक साल की सार्वजनिक सेवा को डॉक्टर राष्ट्रीय कर्तव्य समझ कर निभाएं। जिससे परीक्षा की इस घड़ी में ग्रामीण इलाकों में मुश्किलों का सामना कर रहे जरूरत मंद लोगों को पर्याप्त मेडिकल सहायता मिल सके। हाईकोर्ट ने यह बात तीन डॉक्टरों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।इन तीन डॉक्टरों ने 92 डॉक्टरों के प्रतिनिधि के रुप में यह याचिका दायर की हैं। जिन्हें सरकारी बांड के तहत राज्य के विभिन्न सरकारी व स्थानीय अस्पतालों में एक साल तक के लिए ड्यूटी दी गई है। लेकिन अपनी ड्यूटी पर जाने की बजाय इन डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि सार्वजनिक सेवा के लिए सरकार ने मनमाने तरीके से सूची तैयार की है। इसलिए इसे रद्द कर दिया जाए। क्योंकि इस सूची को तैयार करते समय उनकी प्रतिभा का ध्यान नहीं रखा गया है। इस लिहाज से सरकार ने मनमानीपूर्ण तरीके से डॉक्टरों की सार्वजनिक सेवा को लेकर सूची तैयार की है। यह हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले के भी खिलाफ है। 

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सरकारी वकील ने कहा कि सरकार ने कोरोना संकट के चलते इन डॉक्टरों को सार्वजनिक सेवा में लगाया है। जबकि डॉक्टरों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता वी.एम थोरात ने कहा कि डॉक्टरो की सार्वजनिक सेवा को लेकर तैयार की गई सूची मनमानी पूर्ण है। इसलिए मामले में अंतरिम राहत के तौर पर इस सूची पर रोक लगाई जाए। 

मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद डॉक्टरों को अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया और 13 अक्टूबर तक अपनी ड्यूटी पर जाने को कहा। जबकि राज्य सरकार को दस दिन के भीतर याचिका पर अपना जवाब देने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस मामले में अंतरिम राहत देना अंतिम निर्णय देने जैसा होगा। खंडपीठ ने कहा कि डॉक्टर अपनी सार्वजनिक सेवा को राष्ट्रीय कर्तव्य समझ कर निभाए। ताकि कोरोना के इस संकट के बीच ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंदों को चिकित्सा से जुडी  आवश्यक सहायता मिल सके। 

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