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45 दिन यार्ड में रहेंगी ई‌वीएम, 12 सीटों से नहीं मिली अब तक कोई चुनौती

45 दिन यार्ड में रहेंगी ई‌वीएम, 12 सीटों से नहीं मिली अब तक कोई चुनौती

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिले की 12 विधानसभा क्षेत्रों में हुए चुनाव के बाद शहर के 6 विधानसभा क्षेत्रों की ई‌वीएम मशीनें कलमना यार्ड में पुलिस हिफाजत में रखी गई हैं। मतगणना के बाद 45 दिन तक मशीनें रखी जाती हैं। अगर चुनाव को कोर्ट में चुनौती दी गई तो मशीनों को कोर्ट के फैसले तक पुलिस हिफाजत में सुरक्षित रखा जाता है। जिले की 12 सीटों पर आए नतीजों को अभी तक किसी ने कोर्ट में चुनैाती नहीं दी है। 

ग्रामीण क्षेत्र की मशीनें तहसीलों में 
जिले में 6 विधानसभा क्षेत्र ग्रामीण इलाके में आते है। उमरेड विधानसभा की भिवापुर व कामठी विधानसभा की मशीनें मौदा तहसील कार्यालय में रखी है। काटोल, सावनेर, रामटेक व हिंगना विधानसभा की मशीनें क्रमश: काटोल, सावनेर, रामटेक व हिंगना तहसील कार्यालय में पुलिस बंदोबस्त में रखी गई है। 

45 दिन के बाद क्लीयर 
चुनाव नतीजे या इससे संबंधित प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई, तो चुनाव आयोग के निर्देश पर संबंधित मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) करके क्लीयर किया जाता है। इसके बाद चुनाव आयोग के आदेश पर जहां चुनाव होने है, वहां इन मशीनों को भेज दिया जाता है। 

नागपुर, रामटेक लोकसभा की मशीनें भी कलमना में 
नागपुर व रामटेक लोकसभा चुनाव को नागपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस कारण नागपुर व रामटेक लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम, कंट्रोल यूनिट व वीवीपैट मशीनें कलमना यार्ड में रखी गई हैं। लोकसभा व विधानसभा में इस्तेमाल मशीनें कलमना में अलग-अलग यार्ड में रखी गई हैं।

ऐसी है व्यवस्था
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों पर गौर करें तो मतगणना के 45 दिन तक ईवीएम (बीयू), कंट्रोल यूनिट (सीयू) व वीवीपैट मशीनें रखी जाती हैं। जिला प्रशासन ने एपीएमसी कलमना यार्ड परिसर के  मिर्ची बाजार के पास 10 कमरे लिए गए हैं। यहां शहर के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, मध्य व उत्तर नागपुर निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल हुई मशीनें रखी गई है। यहां 24 घंटे पुलिस तैनात है। जवानों के लिए भी एक कमरा बुक है। यहां की गतिविधियां सीसीटीवी में कैद हो रही है। जिले में 4412 मतदान केंद्र हैं। इसमें से 21 सौ से ज्यादा मतदान केंद्र शहर की छह विधानसभा क्षेत्रों में आती हैं। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।