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फडणवीस बोले - अभी तक मंत्री पद पर जमे हैं संजय राठोड़, राज्यपाल के पास नहीं भेजा इस्तीफा, विपक्ष का वॉक आऊट 

फडणवीस बोले - अभी तक मंत्री पद पर जमे हैं संजय राठोड़, राज्यपाल के पास नहीं भेजा इस्तीफा, विपक्ष का वॉक आऊट 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पूजा चव्हाण मामले में फंसे संजय राठौड़ को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि इस्ताफा फ्रेम कराने के लिए नहीं रखा है, लेकिन अब तक ऐसा सुनने में नहीं आया कि उन्होंने इस्तीफा राज्यपाल के पास भेजा है। मुझे नहीं पता कि वह फ्रेम कराने के लिए रखा गया है या नहीं। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान फडणवीस ने कहा कि 20 दिन बीत जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। 12 ऑडियो क्लिप में जो सबूत हैं, उससे ज्यादा क्या सबूत चाहिए। किसी मामले में इतने ठोस सबूत नहीं होते।

फडणवीस ने कहा कि यवतमाल के मेडिकल कॉलेज में जो हुआ है, उसका लिंक, सभी टावर लोकेशन सरकार के पास है। कौन किससे मिला सरकार जानती है। अरूण राठोड़ का बयान भी सरकार के पास है फिर भी एफआईआर नहीं दर्ज की जा रही है। सरकार बहाना बना रही है कि पूजा के माता-पिता शिकायत नहीं कर रहे हैं। किसी की शिकायत की जरूरत नहीं है। अपराध समाज के खिलाफ होता है। मुकदमा सरकार विरुद्ध आरोपी चलाया जाता है। अवैध गर्भपात का भी मामला है। जिस पूजा राठौड़ का गर्भपात हुआ वह कौन है। इस मामले में कई सवाल हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि मामले की जांच हो। उन्होंने कहा कि आप पुलिस पर दबाव बनाकर उन्हें बचा सकते हैं, लेकिन रात में सो नहीं पाएंगे। 

महबूब शेख पर नहीं हो रही कार्रवाई

फडणवीस ने कहा कि महबूब शेख पर सिर्फ इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही है, क्योंकि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता हैं। एफआईआर हुई और उसके बाद महिला बार-बार सामने आकर बलात्कार की जानकारी दे रही है। लेकिन डीसीपी आरोपी का बचाव कर रहे हैं। फडणवीस ने सवाल किया कि क्या प्रस्तावित शक्ति कानून में सत्ता पक्ष, विपक्ष और जनता के लिए अलग-अलग कानून बनेगा। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है और इंडिया जस्टिस की रिपोर्ट के मुताबिक कानून व्यवस्था के मामले मे महाराष्ट्र 2019 में चौथे नंबर पर था और 2020 में 13वें नंबर पर पहुंच गया।  

तो बच जातीं 30 हजार से ज्यादा जाने

फडणवीस ने राज्य सरकार पर कोरोना संक्रमण रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि अगर सही तरीके से रणनीति बनाई जाती तो 30 हजार से ज्यादा जानें बच सकतीं थीं। उन्होंने दावा किया कि कोविड सेंटर के नाम पर राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अगर कोरोना से निपटने के बेहतर उपाय किए होते तो मरीजों की संख्या 9 लाख 55 हजार कम होती और 30 हजार 900 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। राज्य में 40 फीसदी कोरोना मरीज और बीमारी से जान गंवाने वाले 35 फीसदी महाराष्ट्र के रहे। अब भी 46 फीसदी एक्टिव मरीज राज्य में हैं, इसके बावजूद सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े अस्पताल रिकॉर्ड समय में बनाने का दावा कर रही है, लेकिन इसमें रिकॉर्ड भ्रष्टाचार भी हुआ है। जिस बेडशीट को दो लाख रुपए में खरीदा जा सकता था, उसके लिए 8.5 लाख रुपए किराया दिया गया। 90 दिन में पंखे के लिए 9 हजार किराया दिया, जिसमें कितने पंखे खरीदे जा सकते थे। इसी तरह गद्दे, तकिया, सलाइन के लिए 60 लाख रुपए खर्च किए गए। 1200 रुपए का थर्मामीटर 6500 रुपए में खरीदा गया। 150 टेबल का किराया छह लाख 75 हजार रुपए और कुर्सियों के लिए 4 लाख रुपए किराया दिया गया। मृत शरीर के लिए बैग और पीपीई किट में भी घोटाला किया गया। अमरावती में अब भी कोरोना पॉजिटिव घोषित करने का रैकेट चल रहा है। 

परेशान है किसान

फडणवीस ने कहा कि राज्य का किसान परेशान है। अमरावती, अकोला विभाग में बोंडअली के चलते 88 से 100 फीसदी तक फसलों का नुकसान हुआ है, मराठवाडा के किसान भी बेमौसम बरसात से परेशान हैं। लेकिन किसानों को मदद मिलना तो दूर उनकी बिजली काटी जा रही है।

संसदीय कार्यमंत्री की टिप्पणी से नाराज होकर विपक्ष ने किया वॉक आऊट

प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब की विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर के भाषण पर की गई टिप्पणी से नाराज विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। इस कारण कुछ समय तक बिना विपक्ष के सदन का कामकाज चला। विपक्ष ने सरकार को सदन का कामकाज नहीं चलने देने की चेतावनी दी है। दरअसल मंगलवार को सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान दरेकर बोल रहे थे। इसी बीच परब ने कहा कि मैंने विधानसभा में विपक्ष के सदस्यों का भाषण सुना। दरेकर वही भाषण दे रहे हैं लेकिन उस भाषण के कुछ पन्ने गायब नजर आ रहा है। विपक्ष के किसी सदस्य को जाकर पूरा भाषण लेकर आना चाहिए। इससे नाराज दरेकर का गुस्सा फूड पड़ा। उन्होंने कहा कि परब ने यह टिप्पणी करके विपक्ष के नेता का अपमान किया है। मैं इसकी निंदा करता हूं। परब यह तय नहीं कर सकते हैं कि विपक्ष के नेता क्या बोलेंगे ? परब को यह बोलने का अधिकार किसने दिया ? चापलूसी करने की भी मर्यादा होती है। विपक्ष पूरा बजट सत्र सदन का बहिष्कार करेगा। दरेकर ने कहा कि परब के माफी मांगने तक कामकाज चलने नहीं देंगे। इस बीच सदन में विपक्ष के सदस्य वेल में आकर हंगामा करने लगे। जिसके बाद उपसभापति नीलम गोर्हे ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित की। सदन का कामकाज दोबारा शुरू होने के बाद विपक्ष के सदस्य परब की माफी मांगने की मांग पर अड़ गए। भाजपा सदस्य भाई गिरकर ने कहा कि परब ने विपक्ष का नेता का अपमान किया है। उन्होंने सदन से माफी मांगनी चाहिए। जबकि परब ने कहा कि मेरा दरेकर का अपमान करने का उद्देश्य नहीं था। मैंने दोस्त के नाते उनसे यह बात कही थी। मुझे नहीं लगता है कि मैंने कोई गलत बात कही है। परब के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर दिया।
 

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