दैनिक भास्कर हिंदी: फादर्स-डे : किसी ने अपने बच्चों को मां की कमी महसूस नहीं होने दी, तो किसी के बच्चे उसे वृद्धाश्रम छोड़ा

June 21st, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पिता को सम्मान देने के लिए फादर्स-डे मनाया जाता है। हर वर्ष जून माह के तीसरे रविवार को फादर्स-डे मनाया जाता है।  कुछ बच्चे इस दिन अपने पिता को उपहार देते हैं और कुछ तरह-तरह की चीजें कर उनका दिन स्पेशल बनाते हैं।  कुछ लोग अपने पिता के साथ बाहर घूमने जाते हैं, तो कुछ लोग इस दिन पिता के लिए स्पेशल खाना भी बनाते हैं।  फादर्स-डे पर दो ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें एक पिता बच्चों की मां की तरह परवरिश कर रहे हैं, तो वहीं एक पिता ऐसे भी हैं, जिन्हें उनके बेटे पूछ तक नहीं रहे हैं। फादर्स-डे पर किसी ने कटु तो किसी ने सुनहरे पलों को याद किया। पांचपावली निवासी निकिता व पवन वाट ने बताया कि पांच वर्ष पहले मां का देहांत हो गया। तब से पापा ने हम दोनों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। मां की तरह वे सुबह उठकर हमारे लिए चाय-नाश्ता बनाते थे। निकिता ने बताया कि इस वर्ष एमएससी फाइनल में हूं। पापा इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग का काम करते हैं। मैं सब्जी में छोंक लगाती हंू, तो पापा सब्जी काटकर देते हैं। मां की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता, लेकिन पापा ने आज तक हम दोनों की आंखों में आंसू नहीं आने दिए। हमारी हर सपने पापा पूरे करते हैं। हमारे पापा दुनिया के बेस्ट पापा हैं। फादर्स-डे पर हमने पापा के लिए सरप्राइज प्लान किया है।

लॉकडाउन में पापा के साथ उठाया आनंद : फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी सलोनी और किशन ने बताया कि लॉकडाउन में जब ऑफिस बंद थे, घर पर मैड नहीं आ रही थी। तो पापा ने मम्मी को बहुत सपोर्ट किया। हम बच्चों का भी पापा ने बहुत ध्यान रखा। शाम को पापा ही कुकिंग करते थे। पहले पापा इतने बिजी होते थे, कि उनके पास हमारे लिए समय ही नहीं था। लॉकडाउन में हमने पापा के साथ बहुत एंजॉय किया। इस बार फादर्स-डे पर पापा के लिए खास सरप्राइज प्लान किया हैं। पापा के लिए बहुत सुंदर कार्ड बनाया हैं। कोरोना के कारण फादर्स-डे घर पर ही मनाने वाले हैं। इस बार का फादर्स-डे बहुत ही स्पेशल हैं।

जहां एक ओर बच्चे अपने पिता के साथ फादर्स-डे मनाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं वृद्धाश्रम में रहने वाले 85 वर्षीय बुजुर्ग पिता अपने बेटों की राह ताक रहे हैं। वृद्धाश्रम में रहने वाले एक बुजुर्ग पिता रामकृष्ण (बदला हुआ नाम) के 4 बेटे हैं। कुछ वर्ष पहले ही उनकी पत्नी का  निधन हो गया। तब बेटों ने पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ दिया। माता-पिता मिलकर 4 बेटों को पालते-पोसते हैं, लेकिन 4 बेटों के लिए एक पिता बोझ बन गया। फादर्स-डे पर पिता इसी आस में है, कि बेटों का फादर्स-डे के माैके पर फोन आएगा। लेकिन पिता हमेशा बच्चों की सलामती की दुआ करते हैं। वृद्धाश्रम में रहकर हर पल को उन्हें याद करते हैं।

खबरें और भी हैं...