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प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी, विद्यार्थी संगठन ने कुलगुरु से मांगा इस्तीफा

प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी, विद्यार्थी संगठन ने कुलगुरु से मांगा इस्तीफा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के तुकड़ोजी महाराज अध्यासन केंद्र में ‘ग्राम सेवाव्रती’ नामक एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए डॉ.बाबासाहब आंबेडकर विद्यार्थी संगठन ने कुलगुरु डॉ. सिद्धार्थविनायक काणे के इस्तीफे की मांग की है। 

यह है मामला
संगठन का आरोप है कि पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए 15 अक्टूबर आखिरी दिन था। 20 सीटों के लिए 40 से अधिक उम्मीदवार विश्वविद्यालय में प्रवेश फॉर्म लेने पहुंचे, लेकिन संबंधित बाबू ने केवल अपनी पसंद के विद्यार्थियों को ही प्रवेश फॉर्म दिए, जिसके कारण कई विद्यार्थी फाॅर्म नहीं भर सके। कई विद्यार्थियों से फिजुल दस्तावेज मांगे गए, नहीं देने पर उन्हें प्रवेश फॉर्म देने से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर 15 अक्टूबर को भी विद्यार्थियों का एक शिष्टमंडल ने कुलगुरु डॉ. सिद्धार्थविनायक काणे से मुलाकात की थी, लेकिन उनकी ओर से इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद अब संगठन ने कुलगुरु के इस्तीफे की मांग की है। 

ऐसी है व्यवस्था
दरअसल, इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी की उम्र 30 वर्ष से कम हो, तो उसे प्रतिमाह 5 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाएगा। यह कोर्स वार्षिक पैटर्न का होगा, इसमें प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए नियमित उपस्थिति, असाइनमंेट और फील्ड वर्क जरूरी होगा। इसके अलावा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले 10 विद्यार्थियों को विवि के भरत नगर स्थित नेल्सन मंडेला छात्रावास मंे सामान्य दरों पर प्रवेश भी दिया जाएगा। इसी कारण से पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कई विद्यार्थी आगे आए, लेकिन विभाग मंे मनमाने ढंग से प्रवेश से नाराज विद्यार्थियों ने अपना आक्रोश व्यक्त किया है।  

एग्जाम की तारीख बदली, एक दिन में दो पेपर
दो पेपर की तिथियों में टकराव के कारण राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने अपनी शीतकालीन परीक्षाओं की कुछ तिथियों में फेरबदल किया है। इसमें बैचलर ऑफ फार्मेसी चौथे सेेमिस्टर की परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा विवि ने बी.कॉम प्रथम सेमिस्टर के अनिवार्य भाषा विषय का पेपर भी 13 नवंबर को रखा था। इसी िदन सीए की परीक्षा है। ऐसे में विवि ने 13 नवंबर का पेपर स्थगित कर 29 नवंबर को रखा है। इसी तरह 20 नवंबर को होने वाले बीआईडी तीसरे सेमिस्टर के फर्नीचर डिजाइन 1 का पेपर भी 29 नवंबर को रखा गया है। 

परीक्षा-पेपर-पुरानी तिथि-नई  
* बैचलर ऑफ फार्मेसी 4 सेमिस्टर सीबीसीएस ओल्ड- फार्मास्यूटिकल केमेस्ट्री 4- 30 अक्टूबर- 2 नवंबर
* बैचलर ऑफ फार्मेसी 4 सेमिस्टर सी एंड जीबीएस- मेडिसिनल केमेस्ट्री 1- 30 अक्टूबर- 2 नवंबर
*बैचलर ऑफ फार्मेसी 8वां सेमिस्टर सीबीएस- फार्मास्यूटिकल बायोक्टेक्नोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी- 30 अक्टूबर- 2 नवंबर

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।