comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

लड़खड़ाई नीलामी, सड़ रहीं मनपा की कबाड़ बसें

लड़खड़ाई नीलामी, सड़ रहीं मनपा की कबाड़ बसें

डिजिटल डेस्क,नागपुर। मनपा के परिवहन विभाग में नई बसों के दाखिल होने पर पुरानी 228 बसों को कबाड़ में डाल दिया गया। हिंगना और टेका नाका डिपो में कबाड़ बसों को खड़ा किया गया है। कबाड़ बसों की नीलामी प्रक्रिया लड़खड़ा जाने से डिपो में एक वर्ष से खड़ी बसें सड़ रही हैं। नीलामी प्रक्रिया में विलंब के चलते दिन-ब-दिन बसों का बिक्री मूल्य कम होने से मनपा का अनपेक्षित नुकसान हो रहा है। मनपा के परिवहन विभाग में आपली बस, मिनी बस, मिडी बस, इलेक्ट्रिक पर चलने वाली प्रदूषण मुक्त बस, महिलाओं के िलए तेजस्विनी बस सेवा चलाई जा रही है। मनपा परिवहन विभाग के बेड़े में नई बसों के दाखिल दाखिल हुई हैं। वहीं लंबे समय तक सेवा देने से खराब  हो गई पुरानी बसों को हटा दिया गया है। इसमें से कुछ बसों को इलेक्ट्रिक बस में परावर्तित किया गया। शेष 228 बसों की नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की गई। नीलामी प्रक्रिया बीच में ही लड़खड़ा गई।

कबाड़ बसों की नीलामी के लिए एक वर्ष पूर्व परिवहन समिति ने उपसमिति गठित की थी। प्रवीण भिसीकर को समिति का अध्यक्ष और नितीन साठवने तथा अर्चना पाठक को सदस्य चुना गया था। समिति का कामकाज शुरू हुआ, अनेक बैठकें हुईं। नीलामी से पहले ही अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया। नए अध्यक्ष का चयन होने के बाद नीलामी अपेक्षित थी। परंतु अध्यक्ष का चयन नहीं किए जाने से नीलामी ठंडे बस्ते में पड़ी है। 
रजिस्ट्रेशन रद्द कराने की  प्रक्रिया अधूरी 

बसों की नीलामी करने से पहले आरटीओ से रजिस्ट्रेशन रद्द करना पड़ता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया की गई। कुछ बसों का रजिस्ट्रेशन रद्द भी हुआ है। कुछ बसों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया अधूरी है। रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद बाजार मूल्य निर्धारित कर नीलामी करनी होगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने तक खड़े-खड़े बसों के सड़ जाने से मनपा के राजस्व को चूना लग रहा है। नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता की दृष्टि से राज्य परिवहन निगम के अधिकारी को प्रक्रिया में सहभागी करने संबंध में प्रशासकीय मंजूरी लेने के उपसमिति ने िनर्देश िदए थे। इस प्रक्रिया में लेट-लतीफी के चलते नीलामी प्रक्रिया लड़खड़ा जाने की जानकारी मिली है।

कमेंट करें
4v5VI
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।