दैनिक भास्कर हिंदी: विदेशी करेंसी पर विराजमान गणपति, जानिए इंडोनेशिया से बैंकॉक तक की कहानी

September 1st, 2017

डिजिटल डेस्क,चंद्रपुर। भारत के अलावा विदेशों में भी गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि के देवता और अग्रपूजा के अधिपति माना जाता है। महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव की प्रथा व्यापक क्रांति लाई और स्वाधीनता आंदोलन में बड़ी भूमिका अदा की। भारत में गुप्त साम्राज्य तत्कालीन त्रावणकोर स्टेट जैसे स्थानों पर भी गणेश की तांबा, कांसा आदि धातु की मुद्राएं दिखाई देती थी। सबसे खास बात ये है कि एशिया खंड के नेपाल, कंबोडिया, थाइलैंड, इंडोनेशिया, अफगानिस्तान जैसे देशों के सिक्के, लिफाफे, डाक टिकट पर भी गणेश अंकित हैं।

चंद्रपुर के प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय इतिहास संशोधक, पुरातत्वविद और सिक्के, डाक टिकट आदि के संग्राहक अशोक सिंह ठाकुर के पास विश्व के नायाब व अनमोल सिक्कों समेत हजारों पुरातत्वीय वस्तुओं का संग्रहण है। प्राचीन भारत में देवी-देवताओं के चिह्नांकित कई राजमुद्राओं, सिक्कों का चलन था।

इंडोनेशिया से बैंकॉक तक की कहानी

  • इंडोनेशिया ने 1998 में 20 हजार रुपए का नोट प्रचलित किया था। उस पर श्री गणेश और लक्ष्मी अंकित हैं। शिक्षा को बढ़ावा देने की दृष्टि से स्कूली छात्रों को नोट के दूसरी ओर अंकित किया है। इसे 'दुआ पुलूह रिबू रूपीह' कहा गया है।
  • वर्ष 2009 में थाइलैंड सरकार ने भगवान विष्णु और सरस्वती के सिक्के प्रचालित किए।
  • 2 जून 2009 को थाइलैंड पोस्ट कंपनी लिमिटेड बैंकाक ने गणेश, ब्रह्मा, नारायण (विष्णु) और महेश (शिव) के डाक टिकट और लिफाफा प्रकाशित किया। इस लिफाफे पर शंख के साथ बिल्वपत्र अंकित है। इस पर थाइलैंड डाक सेवा का सील ओम चिन्हाकिंत हैं। लिफाफे के सारे टिकट 5 रुपए कीमत के हैं।
  • थाइलैंड सरकार ने गणेश अंकित करेंसी भी बनवाई है। इसमें गणेश का वर्णन लार्ड ऑफ सक्सेस अर्थात सफलता के देवता के रूप में किया है।
  • नेपाल सरकार ने 2003 में कागेश्वर गणेश काठमांडू का 5 रुपए का डाक टिकट प्रकाशित किया था।
  • वर्तमान में भी केवल भारत को छोड़कर एशिया के कई देशों में प्राचीन परंपराओं का सम्मान किया जा रहा है।
  • भारत एक समय जब वर्तमान अफगानिस्तान से लेकर इंडोनेशिया तक फैला हुआ था, उस दौरान देवी-देवताओं के साथ तत्कालीन सांस्कृतिक विरासतों को भी सहेजने का कार्य किया जाता था।
  • जंगली और पालतू प्राणियों को भी सिक्कों तथा राजमुद्राओं पर अंकित किया जाता था।