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शाह की चुप्पी रहस्यपूर्ण, राऊत का आरोप - शिवसेना विधायकों को तोड़ने के लिए गुंडों का इस्तेमाल

शाह की चुप्पी रहस्यपूर्ण, राऊत का आरोप - शिवसेना विधायकों को तोड़ने के लिए गुंडों का इस्तेमाल

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुख्यमंत्री पद को लेकर रार के बीच शिवसेना सांसद संजय राऊत ने नाम लिए बैगर भाजपा पर पार्टी के विधायकों को तोड़ने का आरोप लगाया है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में राऊत ने कहा कि सरकारी मशीनरी शिवसेना के विधायकों से संपर्क करने के लिए गुंडों का इस्तेमाल कर रही है। कुछ गुंडे हैं जो जेल से छूटकर राजनीति में बड़े-बड़े पदों पर बैठे हैं उन्हें राज्य सरकार का आशीर्वाद मिला है। इन गुंडों ने पिछले 10 दिनों में शिवसेना के विधायकों पर दबाव डालने की बहुत कोशिश की। लेकिन महाराष्ट्र में ये गुंडागर्दी तक नहीं चली और सभी गुंडे बिल में घुस गए। ये गुंडे किसके पास जा रहे थे और क्या बातचीत कर रहे थे। इसकी जानकारी मेरे पास आ गई है जल्द ही मैं इसका खुलासा करूंगा। राऊत ने कहा कि ऐसी गंदी राजनीति तो गुंडों की टोली भी नहीं करती। इस तरह की राजनीति महाराष्ट्र को शोभा नहीं देती। इसके जवाब में भाजपा की ओर से प्रदेश के जलसंसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने नाशिक में कहा कि राऊत को गुंडों के इस्तेमाल के बारे में सबूत देना चाहिए। राऊत को ऐसे बयानों से बचना चाहिए जिससे युति में तनाव पैदा हो। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष नवाब मलिक ने कहा कि राऊत ने जो कहा है वो सत्य है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में गुंडों और बेहिसाब पैसों का इस्तेमाल करके ही 105 सीटें हासिल की है। 

शिवसेना के मुख्यमंत्री शीवतीर्थ पर लेंगे शपथ

राऊत ने कहा कि शिवसेना के मुख्यमंत्री का शपथ विधि समारोह दादर स्थित शिवाजी पार्क मैदान के शीवतीर्थ पर होगा। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार भाजपा ने नए मंत्रिमंडल की शपथविधि के लिए वानखेड़े स्टेडियम और महालक्ष्णी रेस कोर्स का मैदान बुक किया है। मुझे पता नहीं कि भाजपा के मुख्यमंत्री कितनी जगहों पर शपथ लेंगे। लेकिन मैं निश्चित रूप से यह कह सकता हूं कि शिवसेना के मुख्यमंत्री शिवतीर्थ पर लेंगे। राऊत ने कहा कि शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे कह चुके हैं कि सरकार बनाने के लिए पार्टी के पास कई विकल्प हैं। इसमें से एक विकल्प पर चर्चा पूरी हो चुकी है। उद्धव अपने फैसले के करीब पहुंच चुके हैं। आंकड़ों का समीकरण बन जाने के बाद उद्धव खुद मीडिया के सामने आएंगे। राऊत ने कहा कि मैं दावे के साथ कहता हूं कि शिवसेना के पास 170 विधायकों का समर्थन है जो बढ़कर 175 हो सकता है। भाजपा की तरफ से केंद्र सरकार में दो मंत्री पद और दो राज्यों में राज्यपाल देने के प्रस्ताव के सवाल पर राऊत ने कहा कि शिवसेना बाजार में नहीं बैठी है। हमने भाजपा से मुख्यमंत्री पद पर बातचीत की है। अब मुख्यमंत्री पद पर ही चर्चा होगी। यदि भाजपा से चर्चा नहीं हुई तो शिवसेना अपने दम पर मुख्यमंत्री बनाकर दिखाएगी। राऊत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लिए बिना कहा कि शिवसेना और भाजपा के बीच के बातचीत शुरू होने में रोड़ा यदि कोई बना है तो वो झूठ बोलने वाले लोग हैं। 

अमित शाह की चुप्पी रहस्यपूर्ण 

राऊत ने कहा कि प्रदेश में नई सरकार बनाने के बारे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी रहस्यपूर्ण है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद उन्हें सरकार बनाने के लिए रुचि नहीं दिखाई। राऊत ने कहा कि हरियाणा जैसे छोटे प्रदेश में सरकार बनाने की अड़चन को शाह ने आगे आकर खुद सुलझाया लेकिन महराष्ट्र में किसी तरह की पहल नहीं की। राऊत ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले शाह के सामने सत्ता में भागीदारी के 50-50 फार्मूले की बात हुई थी। इसकी जानकारी उद्धव दे चुके हैं। अगर शाह और उद्धव के बीच बैठक होती तो 50-50 फार्मूले के बारे में बातें स्पष्ट हो गई होती। 

पवार राज्य की राजनीति में नहीं लौटेंगे 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर राऊत ने कहा कि पवार प्रदेश की राजनीति में नहीं लौटेंगे। वे देश के बड़े नेता हैं। देश का प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। उनके लिए अब कोई पद छोटा है उनका व्यक्तित्व बहुत बड़ा है। राऊत ने कहा कि पवार के कद का अनुभवी नेता देश में नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति का पेंच सुलझाने के लिए अगर हम पवार का मार्गदर्शन लेते हैं तो इसमें कोई गलत बात नहीं है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने भी स्पष्ट किया कि पवार मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। अजित ने कहा कि पवार केवल महाराष्ट्र में बदलाव चाहते थे जिसके लिए उन्होंने चुनाव में काफी मेहनत की। चुनाव परिणाम सभी के सामने है। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।