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विधान परिषद की 12 सीटों पर 21 नवंबर तक नियुक्ति करने राज्यपाल से सरकार ने किया आग्रह 

विधान परिषद की 12 सीटों पर 21 नवंबर तक नियुक्ति करने राज्यपाल से सरकार ने किया आग्रह 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश की महाविकास आघाड़ी सरकार ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से विधान परिषद की राज्यपाल नामित रिक्त 12 सीटों पर नियुक्ति के बारे में 21 नवंबर तक फैसला लेने का आग्रह किया है। विधान परिषद की राज्यपाल कोटे की 12 सीटें बीते जून महीने से रिक्त हैं। राज्य मंत्रिमंडल के मंजूरी के बाद राज्यपाल नामित 12 सीटों पर नियुक्ति के लिए राज्यपाल को नामों की सिफारिश की गई है। पिछले 6 नवंबर को सरकार की ओर से प्रदेश के परिवहन मंत्री अनिल परब, अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक और चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने राज्यपाल को बंद लिफाफे में नामों की सूची सौंपी थी। अब सरकार की ओर से राज्यपाल से 21 नवंबर तक सूची को मंजूरी देने की अपील की गई है। राज्यपाल नामित 12 सदस्यों की सूची में सत्ताधारी शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के चार-चार सदस्यों का समावेश है। राज्य विधानमंडल का शीतकालीन अधिवेशन नागपुर के बजाय इस बार मुंबई में 7 दिसंबर से शुरू होगा। महाविकास आघाड़ी को उम्मीद है कि राज्यपाल शीतकालीन सत्र से पहले राज्यपाल नामित सीटों पर नियुक्ति के लिए मुहर लगा देंगे। विधान परिषद में राज्यपाल नामित 12 सीटें बीते जून महीने में रिक्त हुई थीं। लेकिन कोरोना संकट के कारण इन सीटों पर नियुक्ति में देरी हुई है।  राज्यपाल नामित 12 सीटों पर कला, साहित्य, विज्ञान, समाजसेवा और सहकारिता में से किसी एक क्षेत्र में योगदान देने वालों की नियुक्ति की जाती है। दूसरी ओर विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर ने महाविकास आघाड़ी सरकार पर हमला बोला है। दरेकर ने कहा कि राज्यपाल को लेकर महाविकास आघाड़ी के नेताओं का मन कलुषित हो गया है। सरकार की ओर से विधान परिषद में राज्यपाल नामित 12 सीटों पर नियुक्ति के लिए समय देना उचित नहीं है। राज्यपाल नियमों और संविधान के दायरे में रहकर फैसला लेंगे। इस तरीके से जल्दबाजी से कुछ हासिल नहीं होगा। रविवार को दरेकर ने राज्यपाल से मुलाकात भी की। दरेकर ने कहा कि मैंने राज्यपाल से दिवाली की शुभकामनाएं देने के लिए मुलाकात की। मैंने उनसे राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं की। 

राज्यपाल नामित 12 सदस्यों की सूची में संभावित नाम 

कांग्रेस - रजनी पाटील, सचिन सावंत, मुजफ्फर हुसैन, अनिरूद्ध वनकर
राकांपा - एकनाथ खडसे, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे, आनंद शिंदे 
शिवसेना - अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर, चंद्रकांत रघुवंशी, विजय करंजकर और नितीन बानगुडे-पाटील 

राज्यपाल मनोनित सीट मामले में हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश जारी करने से इंकार

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने विधानपरिषद में राज्यपाल मनोनीत 12 सीटों पर नियुक्ति को लेकर राज्य मंत्रिमंडल की ओर से भेजे गए नामों का खुलासा करने के विषय में तत्काल अंतरिम आदेश जारी करने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एस सी गुप्ते व न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्रिमंडल ने सदस्यों को मनोनीत करने के विषय में अपनी सलाह राज्यपाल को भेज दी है। अभी यह मामला सिफारिश के पड़ाव पर है। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 163 (3) के इसकी जांच का सवाल ही नहीं पैदा होता है। लिहाजा हम इस मामले में फिलहाल तत्काल अंतरिम आदेश नहीं जारी का सकते है। इस विषय पर हम अगली सुनवाई के दौरान विचार करेंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील सतीश तलेकर ने खंडपीठ से नामों का खुलासा करने का आग्रह किया था। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2020 को रखी है।  पिछले दिनों विधानपरिषद की 12 सीटों पर नियुक्ति के लिए प्रस्तावित सदस्यों के नाम गोपनीय तरीके से भेजे जाने को लेकर हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर याचिकाकर्ताओं ने एतराज व्यक्त किया था। आवेदन में कहा गया है कि जिन लोग के नाम की सिफारिश मनोनीत किए जाने के लिए की गई है उन नामों का सार्वजनिक किया जाना अपेक्षित है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। आवेदन के साथ इस विषय को लेकर दायर याचिका में दावा किया गया है संविधान में किए गए प्रावधान के तहत राज्यपाल के पास विधानपरिषद में 12 सीटों पर साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता व समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान व अनुभव रखने वाले लोगों को मनोनीत करने का अधिकार है लेकिन हर बार सिर्फ राजनीतिक जगत से जुड़े लोगों की इन 12 सीटों पर नियुक्ति की जाती है। 

याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कोर्ट को आश्वस्त किया गया था कि 12 सीटों पर जिन लोगों की सिफारिश की जाएगी। इसकी जानकारी याचिकाकर्ताओं को दी जाएगी। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में आग्रह किया है कि किन नामों की सिफारिश की गई है इसका खुलासा किया जाए। फिर भी सरकार ने गोपनीय तरीके से राज्यपाल के पास नामों को भेजा है। याचिका के मुताबिक राज्यपाल को 12 सीटों पर विभिन्न क्षेत्रो के लोगों की नियुक्ति करने का अधिकार देने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि इन लोगों के विशेष ज्ञान का लाभ सदन को मिल सके। लेकिन पिछले कई दशकों से कुछ अपवादों को छोड़ दे तो सिर्फ राजनीतिक जगत से जुड़े लोगों की नियुक्ति इन सीटों पर हो रही है। 

याचिका के अनुसार जनता के द्वारा चुने जाने वाले उम्मीदवारों को जैसे अपनी संपत्ति व आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी होता है वैसे इन 12 सीटों पर मनोनीत होनेवाले उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी देना आवश्यक नहीं होता है। इन सीटों की नियुक्ति प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं होती। इसलिए इन सीटों से जुड़ा उद्देश्य प्रभावित होता है।ऐसे जिन लोगों के नामों की सिफारिश 12 सीटो के लिए की जाती है। उनकी छानबीन उच्चाधिकार कमेटी से कराई जाए। इसके बाद उनके नामो को राज्यपाल के पास भेजा जाए। याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्होंने ने 12 सीटो पर नियुक्ति के लिए इच्छुक लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि व चरित्र को लेकर सूचना के अधिकार के तहत मांगी थी लेकिन अब तक उन्हें इस बारे में सूचना नहीं दी गई है।  


 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।