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स्वास्थ्य मंत्रालय की टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने पूरा किया 5 लाख टेलीकंसल्टेशंसई-संजीवनी ओपीडी के जरिये अब 216 ऑनलाइन का संचालन

October 13th, 2020 16:56 IST
स्वास्थ्य मंत्रालय की टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने पूरा किया 5 लाख टेलीकंसल्टेशंसई-संजीवनी ओपीडी के जरिये अब 216 ऑनलाइन का संचालन

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय की टेलीमेडिसिन पहल ई-संजीवनी रोगियों और डॉक्टरों के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रही है। इसने बहुत कम समय में 5 लाख टेलीकंसल्टेशन पूरा किया है। अंतिम एक लाख परामर्श 17 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के डिजिटल साधन के तौर पर ई-संजीवनी धीरे-धीरे भारतीय स्वास्थ्य सेवा डिलिवरी प्रणाली की एक समानांतर धारा के रूप में आकार ले रही है। पिछले कुछ दिनों में इस प्लेटफॉर्म पर दैनिक टेलीकंसल्टेशन की संख्या 8,000 के पार पहुंच गई। वर्तमान में 26 राज्य ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन के दो वेरिएंट- डॉक्टर से डॉक्टर (ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी) और रोगी से डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी)- का उपयोग कर रहे हैं। ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी को नवंबर 2019 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था। इसे भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत पहचान किए गए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के साथ मिलकर दिसंबर 2022 तक 'हब एंड स्पोक' मॉडल में 1,55,000 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में लागू किया जाना है। ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी लगभग 4,000 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों पर कार्य कर रही है और इसके बराबर संख्या में एचडब्ल्यूसी पर काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल का दूसरा संस्करण ई-संजीवनी ओपीडी को पहले लॉकडाउन के दौरान 13 अप्रैल 2020 को लॉन्च किया गया था जब देश भर में ओपीडी बंद थे। इसमें दुनिया का सबसे बड़ा टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म बनने की क्षमता मौजूद है। ई-संजीवनी ओपीडी के तहत मरीजों को उनके घरों तक ओपीडी सेवाएं उपलब्‍ध कराई गई हैं। ई-संजीवनी ओपीडी को मरीजों और डॉक्टरों दोनों द्वारा समान रूप से स्वीकार किया गया है। करीब 100 टेलीमेडिसिन चिकित्सकों ने 1,000 से अधिक टेलीकंसल्टेशन को पूरा किया है और उनमें से कुछ ने तो 10,000 से अधिक कंसल्टेशन को लॉगइन किया है। दूसरी ओर, 20 प्रतिशत से अधिक रोगियों ने एक से अधिक बार डॉक्टरों से परामर्श करने के लिए ई-संजीवनी का उपयोग किया है। देश भर में ई-संजीवनी ओपीडी को तेजी से स्वीकार किए जाने बाद स्पेशियलिटी एवं सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी की व्यापक श्रृंखला की शुरुआत के साथ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सामान्य और स्‍पेशिएलिटी ओपीडी के अलावा एम्स बठिंडा ने विकिरण ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, बाल चिकित्सा सर्जरी जैसी सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी की स्थापना की है। ये सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश सहित आसपास के सभी राज्यों में मरीजों को ऑनलाइन ओपीडी सेवाएं प्रदान करते हैं। तमिलनाडु सरकार ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से आयुष, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओपीडी सेवाएं प्रदान कर रही है। नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने मरीजों के लिए नई दिल्ली में एक डेंटल एंड ओरल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी ओपीडी की स्थापना की है। केरल लोगों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम- डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर की सेवाएं प्रदान करने के लिए ई-संजीवनी ओपीडी के तहत 14 ओपीडी स्थापित कर रहा है। टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म पर इन 14 ओपीडी में से प्रत्येक में मनोवैज्ञानिक, स्पेशल एजुकेटर, स्‍पीच थेरेपिस्ट और एक फिजियोथेरेपिस्ट की एक टीम होती है जो बच्चों के विकास और उनके भविष्य के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को दूर कर सकती है। वर्तमान में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत 26 सामान्य ओपीडी और 190 स्पेशिएलिटी एवं सुपर-स्पेशिएलिटी ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। देश भर के लगभग 20,000 डॉक्टरों और स्वास्थ्य-कर्मियों को दोनों प्रकार के ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के लिए प्रशिक्षित किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-संजीवनी की स्वीकार्यता को बढ़ावा देने के लिए एक दमदार डिजिटल स्वास्थ्य परिवेश तैयार किया है। इसके अलावा वह मानव एवं ढांचागत संसाधनों की स्थापना करके राज्य सरकारों की मदद कर रहा है। मंत्रालय ने विकास, कार्यान्वयन, संचालन और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण जैसी एंड-टु-एंड तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए सेंटर फॉर एडवांस कंप्यूटिंग की मोहाली शाखा से संपर्क किया है। जिन दस राज्यों ने ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी प्लेटफॉर्म के जरिये सबसे अधिक टेलीकंसल्टेशन दर्ज किया है उनमें तमिलनाडु (169977), उत्तर प्रदेश (134992), हिमाचल प्रदेश (39326), केरल (39300), आंध्र प्रदेश (31365), उत्तराखंड (16442), मध्य प्रदेश (14965), गुजरात (10839), कर्नाटक (9498

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