दैनिक भास्कर हिंदी:   रेलवे का हाल: अनुकंपा नौकरी के लिए 4 साल से चक्कर लगाते थक गए वारिस

June 25th, 2018

डिजिटल डेस्क,नागपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेल नागपुर मंडल में अनुकंपा नाैकरी के लिए मृतकों के वारिस पिछले चार साल से रेल विभाग की खाक छान रहे हैं। अनुकंपा नौकरी के लिए 19 लोग चक्कर लगाते-लगाते थक गए, लेकिन उन्हें आशा की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। RTI में इसका खुलासा हुआ है। 

ड्यूटी के दौरान मौत होने, 50 फीसदी से ज्यादा विकलांगता आने, शरीर काम करने में असमर्थ होने पर कर्मचारी के वारिस को रेलवे में अनुकंपा नौकरी मिलती है। दक्षिण पूर्व मध्य (एसईसी) रेल नागपुर मंडल में कार्यरत संतोष सिंह की 3 अप्रैल 2014 व व भोजराज यशवंतराव की 19 नवंबर 2014 को ड्यूटी के दौरान मौत हुई थी। इसके अलावा अन्य 15 कर्मचारियों की समय-समय पर मौत हुई थी। आेमप्रकाश दीक्षित व सुरेश कुमार ने स्वेच्छानिवृत्ति (वीआरएस) ली थी। इन 19 कर्मचारियों के वारिसों को अभी तक अनुकंपा नौकरी नहीं मिली। अनुकंपा नियुक्ति तृतीयश्रेणी व चतुर्थश्रेणी में होती है। इन कर्मचारियों के बेटे, बेटी व पत्नियां नौकरी के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी कर चुकी हैं।

रेलवे प्रशासन की तरफ से RTI में बताया गया कि एक मामले में क्वेरी निकालने की वजह से फाइल रिटर्न हुई है, जबकि बाकी मामलों में फाइल मंजूरी के लिए रखी गई है। मंजूरी कब तक मिलेगी आैर नौकरी पर नियुक्ति कब तक हो सकेगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है। घर का मुखिया चले जाने से परिवार की आर्थिक स्थिति नाजूक हो जाती है। रोटी के लिए परिवार के सदस्य को नौकरी जरूरी है। चतुर्थश्रेणी के लिए अनुकंपा नौकरी सीधे दी जा सकती है, जबकि तृतीयश्रेणी के पद के लिए विभाग की तरफ से रिटर्न (लिखित) परीक्षा ली जाती है।

RTI एक्टिविस्ट संजय थुल ने रेल प्रशासन की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए जरूरतमंदों को शीघ्र अनुकंपा नौकरी का लाभ देने की गुजारिश रेल प्रशासन से की है। समय पर नौकरी नहीं मिलने से संबंधित परिवारों की माली हालत खराब होते जा रही है। इधर एसईसी रेलवे नागपुर मंडल के कार्मिक व जनसूचना अधिकारी की तरफ से दावा किया गया कि जरूरी प्रक्रिया पूरी करके फाइल मंजूरी के लिए रखी गई है।