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मालेगांव मामले की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट ने एनआईए से मांगा जवाब

मालेगांव मामले की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट ने एनआईए से मांगा जवाब

डिजिटल डेस्क, मुंबई। साल 2008 के मालेगांव बम धमाके के मुकदमे की सुनवाई में ठोस प्रगति न होने पर बांबे हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा है। इससे पहले हाईकोर्ट ने एक गोपनीय रिपोर्ट पर गौर करने के बाद पाया कि पिछले 6 माह में एनआईए कोर्ट में मालेगांव मामले को लेकर सिर्फ 14 गवाहों की गवाही हुई है। जबकि हाईकोर्ट ने अपने एक पुराने आदेश में दिसंबर 2020 तक  मामले की सुनवाई पूरी करने की अपेक्षा व्यक्त की है। मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बीपी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की खंडपीठ के सामने मालेगांव बम विस्फोट मामले से संबंधित आवेदन सुनवाई के लिए आया। इस दौरान मामले में आरोपी समीर कुलकर्णी ने खंडपीठ के सामने कहा कि मालेगांव मामले को 12 साल पूरे हो गए हैं। फिर भी अभी तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई। अब तक करीब 475 गवाहों में से सिर्फ 140 गवाहों की गवाही हुई है। गत 6 माह में तो सिर्फ 14 गवाहों की गवाही हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े वकील बेवजह की तरीख ले रहे हैं। जानबूझकर मुकदमे की सुनवाई में विलंब किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में दिसंबर 2020 तक इस मामले की सुनवाई पूरी किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की है। ऐसे में यदि इस रफ्तार से मालेगांव मामले की सुनवाई चली तो साल 2020 तक इस मामले की सुनवाई पूरी हो पाना मुश्किल है। 

उन्होंने कहा कि देश में कई बड़े-बड़े मामलों के मुकदमों का फैसला आ गया लेकिन मालेगांव मामले के मुकदमे का फैसला 12 साल बीत जाने के बाद भी नहीं आया। एक आरोपी के लिए यह बेहद पीड़ाजनक है। आखिर क्यों इस मामले की सुनवाई में विलंब हो रहा है। यह समझ से परे है। इन दलीलों व गोपनीय रिपोर्ट को देखने के बाद खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले से जुड़े मुकदमे की सुनवाई में ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। इस दौरान एनआईए की ओर से पैरवी कर रहे वकील संदेश पाटील ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट की प्रति नहीं मिली है यह किस आवेदन पर आयी है ? उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस पर खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 16 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी और अगली सुनवाई के दौरान इस पूरे मामले को लेकर जवाब देने को कहा। 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके के मामले में 6 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस मामले में भाजपा कि भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कनर्ल प्रसाद पुरोहित सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।  फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर हैं।

कोर्ट में पेश हुए एसआरए के सीईओ कपूर 

वहीं बांबे हाईकोर्ट ने झोपडपट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) को कहा है कि वह अपने वकीलों के पैनल के पुर्नगठन करने के बारे में विचार करे। झोपड़पट्टी पुनर्वसन के लिए एसआरए राज्य सरकार के अंतगर्त आनेवाला प्राधिकरण है। इससे पहले हाईकोर्ट ने एसआरए के वकीलों व अधिकारियों की ओर से सुनवाई के दौरान प्रभावी सहयोग न मिलने के चलते एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक कपूर को  तलब किया था। जिसके चलते श्री कपूर मंगलवार को न्यायमूर्ति एसजे काथावाला की खंडपीठ के सामने उपस्थित हुए। खंडपीठ के सामने  बांद्रा इलाके में एसआरए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एचडीआईएल समूह व आरकेडब्लू डेवलपर को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। यह याचिका सिरिल मेकवान ने दायर की है और उसमे दावा किया है कि आरकेडब्यू डेवलपर के प्रोजेक्ट में काफी अनियमितता है।आरकेडबल्यू डेवलपर के मालिक धीरज वाधवान है। जो एचडीआईएल के वाधवान परिवार से जुड़े हुए हैं। सोमवार को खंडपीठ ने मामले को लेकर एसआरए के वकील व कोर्ट में उपस्थित अधिकारी से जानकारी मांगी थी लेकिन सुनवाई के दौरान जरुरी सहयोग न मिल पाने के चलते खंडपीठ ने एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को तलब किया था। 
 

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