कांग्रेस हाईकमान मुश्किल में!: सीएम अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच कैसे खत्म होंगे आपसी विवाद? पार्टी आलाकमान के पास ये है ऑप्शन

December 1st, 2022

डिजिटल डेस्क, जयपुर। देशभर में इन दिनों राजस्थान चर्चा का विषय बना हुआ है। लंबे समय से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच चली आ रही तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर टिप्पणी कर कांग्रेस आलाकमान की टेंशन बढ़ा दी है। जिसके बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राजस्थान का दौरा करके दोनों नेताओं के बीच आपसी सुलह कराने की कोशिश की है। जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच विवाद खत्म होता दिखाई देना लगा है लेकिन बीच-बीच में राज्य के दोनों नेताओं के बीच विवाद का उभर आना कांग्रेस पार्टी को मुश्किल में डाल देती है। वो भी उस वक्त जब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं तथा अगले साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाला है।

गहलोत व पायलट के बीच सियासी जंग खत्म?

दरअसल गहलोत अक्सर पायलट को गद्दार कहते हुए हमला बोलने में पीछे नहीं हटते हैं। उनकी बयानबाजी को लेकर कांग्रेस आलाकमान भी कई बार असहज दिखते हैं। हाल ही में कांग्रेस मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने गहलोत को इस तरह की बयान से बचने की भी नसीहत दी थी। आगे उन्होंने कहा ये भी कहा था कि पार्टी में संगठन सबसे महत्वपूर्ण है। उसके लिए जो भी कदम उठाना होगा पार्टी पीछे नहीं हटेगी। जिसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि गहलोत व पायलट विवाद को खत्म करने के लिए कांग्रेस पार्टी कड़ा एक्शन ले सकती है। वैसे वेणुगोपाल के राजस्थान दौरे के बाद भले ही पायलट व गहलोत के बीच बयानबाजी को लेकर कुछ दिनों के लिए रोक लग गई हो लेकिन सियासी जानकारों की माने तो राज्य के इन दो नेताओं के बीच आंतरिक कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस पार्टी को इन दोनों नेताओं को लेकर ठोस कदम उठाना पड़ेगा वरना आगामी विधानसभा चुनाव-2023 में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़े सकती हैं और बीजेपी को इसका फायदा मिलने की संभावना है।

आलाकमान जल्द ले सकता है बड़ा फैसला

कुछ महीने पहले राजस्थान कांग्रेस में हुए सियासी ड्रामे को लेकर आलाकमान काफी नाराज चल रहा है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान में बड़ा एक्शन ले सकता है और जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन कर सकता है। बताया ये भी जा रहा है कि गहलोत की जगह पायलट को ही राजस्थान नेतृत्व की कमान सौंपी जा सकती है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या गहलोत इसके लिए राजी होंगे? क्योंकि पिछले दिनों के राजनीतिक जंग को देखते हुए कुछ कह पाना मुश्किल है। खास बात यह है कि गहलोत व पायलट के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहता है। गहलोत गुट के नेता पायलट को कभी भी सीएम बनते नहीं देखना चाहते हैं। पायलट की अपेक्षा गहलोत के समर्थन में बड़ी तादाद में विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान के लिए नेतृत्व में परिवर्तन करना टेढ़ी खीर लग रही है। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान के पास गहलोत व पायलट विवाद को खत्म करने के लिए कुछ दरवाजे खुले हैं, जिसके बाद आसानी से ये मामला सुलझ सकता है। 

गहलोत को दिल्ली बुलाया जा सकता है

जानकारों की माने तो अशोक गहलोत को कांग्रेस हाईकमान राज्य की राजनीति से हटाकर राष्ट्रीय राजनीति में बुला सकती है। हालांकि, इस पर अशोक गहलोत राजी होंगे या नहीं ये तो वक्त ही बताएगा। माना जा रहा है कि ऐसा करने के लिए गहलोत को हर हाल में आलाकमान मनाने का प्रयास करेगा। गहलोत को दिल्ली बुलाकर कांग्रेस कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है और उनके अनुभव का फायदा ले सकती है। वैसे गहलोत सीएम कुर्सी की लालच में पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को ठुकरा चुके हैं। वैसे कांग्रेस आलाकमान के पास एक और विकल्प है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाकर गहलोत को राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बंटने वाले टिकटों में उनके समर्थकों को भी वरीयत दी जाए। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच सियासी टकराव को खत्म करने के लिए हाईकमान काम कर सकता है। 

पायलट को मनाने पर विचार

कांग्रेस आलाकमान इन दिनों राजस्थान कलह पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक एक्सपर्ट्स की माने तो पार्टी की यही रणनीति होगी कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव-2023 को लेकर हाईकमान कोई जोखिम नहीं उठाना चाहेगा। ऐसे में सचिन पायलट को मनाया जा सकता है और अगले चुनाव तक रूकने के लिए चुप्पी साधने के लिए कहा जा सकता है ताकि पार्टी विरोधी लहर न उठे। सचिन पायलट को लेकर राजस्थान में इसलिए भी गर्मी ज्यादा है क्योंकि राहुल गांधी व प्रियंका के काफी करीबी माने जाते हैं। माना ये भी जा रहा है कि सचिन पायलट खेमे से इस बार ज्यादा से ज्यादा लोगों को टिकट दिया जा सकता है, ताकि पायलट को अगली बार सीएम बनाने में कोई भी अड़चन सामने न आए। 


 

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