दैनिक भास्कर हिंदी: हाईकोर्ट का आदेश - यदि नौकरी बचानी है तो नागपुर के इस संस्थान से करो कोर्स 

November 11th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने अपनी नौकरी बचाने के लिए दो कर्मचारियों को नागपुर के नेशनल इंस्टीच्यूट फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग संस्थान से फायर सेफ्टी ट्रेनिंग का सर्टीफिकेट कोर्स करने का निर्देश दिया है। मीरा-भायंदर महानगरपालिका के इन दोनों कर्मचारियों को हाईकोर्ट ने एक साल के भीतर यह कोर्स पूरा करने को कहा है और महानगरपालिका को इस कोर्स के खर्च का भुगतान करने को कहा है। यदि दोनों कर्मचारी नियत समय में यह कोर्स पूरा नहीं करते हैं तो महानगरपालिका दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। 

न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने यह निर्देश विनायक पाटील व एक अन्य कर्मचारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। शुरुआत में दोनों कर्मचारियों की फायरमैन के रुप में नियुक्ति की गई थी। इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास व सरकार मान्यता प्राप्त संस्थान से फायरफाइटिंग ट्रेनिंग तय की गई थी। नियुक्ति के बाद महानगरपालिका ने पाया कि दोनों कर्मचारियों ने औरंगाबाद के जिस परमानंद फायर फाइटिंग व सेफ्टी मैनेजमेंट संस्थान से फायर फाइटिंग की ट्रेनिंग ली है, वह संस्थान को  स्टेट बोर्ड फार टेक्निकल एज्युकेशन से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसे देखते हुए महानगरपालिका ने दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी। 

इसके बाद मनपा की स्थायी समिति ने दोनों को दोबारा नियुक्त करने का निर्देश दिया। पर मनपा आयुक्त ने इसे मानने से इंकार कर दिया। लिहाजा दोनों कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस दौरान महानगरपालिका की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एनआर बूबना ने दावा किया कि स्थायी समिति का आदेश उसके ही एक प्रस्ताव के खिलाफ है। जिसे स्थायी समिति ने मंजूरी प्रदान की है। इस दौरान कर्मचारियों के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल एक साल के भीतर फायर सेफ्टी से जुडा कोर्स पूरा करने के लिए राजी हैं। यह आश्वासन मेरे मुवक्किलों ने स्थायी समिती को भी दिया था।

कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में मेरे मुवक्किलों को राहत प्रदान की थी। मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने दोनों कर्मचारियों को नागपुर के नेशनल इंस्टीच्यूट आफ फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग से फायर सेफ्टी ट्रेनिंग का सर्टीफिकेट कोर्स  एक साल में पूरा करने का निर्देश दिया। यदि कर्मचारी निर्धारित अवधि में कोर्स पूरा नहीं करते हैं तो मनपा उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। 

 

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