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अवैध शराब बिक्री : तड़ीपार के लिए 70 प्रस्ताव भेजे, कोई कार्रवाई नहीं

अवैध शराब बिक्री : तड़ीपार के लिए 70 प्रस्ताव भेजे, कोई कार्रवाई नहीं

डिजिटल डेस्क, नागपुर। स्टेट एक्साइज विभाग अवैध शराब विक्रेता व हाथभट्‌ठी की शराब बनाने वालों पर नकेल कसने के लिए संबंधित आरोपियों को तड़ीपार करने  की अनुशंसा का प्रस्ताव उपविभागीय अधिकारियों को भेज रहा है। विभाग की तरफ से अब तक लगभग 70 प्रस्ताव (मामले) भेजे गए हैं, जिनमें से 30 पर अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी है। 

सुनवाई की प्रक्रिया जारी 

स्टेट एक्साइज विभाग अवैध शराब विक्री, शराब का अवैध परिवहन व हाथभट्‌ठी की शराब बनानेवालों पर कार्रवाई करती है। अवैध शराब विक्रेताओं पर नकेल कसने के लिए विभाग ने बार-बार कानून का उल्लंघन करनेवाले आदतन शराब विक्रेताओं को तड़ीपार करने की अनुशंसा का प्रस्ताव जिला प्रशासन के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। इन मामलों की सुनवाई संबंधित एरिया के उपविभागीय अधिकारी करते हैं। विभाग की तरफ से अब तक लगभग 70 प्रस्ताव उपविभागीय अधिकारियों के पास भेजे गए। लगभग 40 आरोपियों से 5 हजार से लेकर 25 हजार तक पर्सनल बांड लिया गया है। बांड लेने के साथ ही इन्हें बांड की नियम शर्तों व कानून  का उल्लंघन करने पर बांड कैैंसल कर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। बाकी बचे 30 प्रस्तावों पर अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी है। फिलहाल ये मामले सुनवाई की प्रक्रिया में चल रहे हैं। 

दो बार पकड़े जाने पर भेजते हैं प्रस्ताव 

एक साल में दो या उससे ज्यादा बार पकड़े जाने पर एक्साइज विभाग संबंधित आरोपी का प्रस्ताव उपविभागीय अधिकारी के पास भेजती है। विभाग मुंबई शराबबंदी कानून के तहत कार्रवाई करती है। शीघ्र ही और कई आरोपियों का प्रस्ताव सुनवाई के लिए उपविभागीय अधिकारी के पास भेजा जाएगा।

अभी तक एक भी तड़ीपार नहीं हुआ 

एक्साइज विभाग ने मुंबई शराबबंदी कानून का बार-बार उल्लंघन करनेवाले 70 आरोपियों का प्रस्ताव तो उपविभागीय अधिकारी के पास भेज दिया, लेकिन अभी तक एक भी आरोपी  को तड़ीपार नहीं किया गया है। आरोपियों को एरिया से बाहर करने का एक्साइज विभाग का मकसद कब पूरा होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगा। 

कार्रवाई का अधिकार हमारे पास नहीं

एक्साइज विभाग के सूत्रों ने बताया कि बार-बार नियम-शर्तों का उल्लंघन करनेवालों के प्रस्ताव उपविभागीय अधिकारी के पास भेजे जा रहे हैं। विभाग ऐसे आरोपियों को क्षेत्र से बाहर करना चाहता है, लेकिन ये अधिकार विभाग के पास नहीं है। उपविभागीय अधिकारी ऐेसे मामलों को सुनता है और जरूरी आदेश देते हैं। हमारे प्रस्ताव पर आरोपी को एरिया से बाहर (तड़ीपार) करने का अधिकार उपविभागीय अधिकारी को है। इस मामले में हमारा बोलना उचित नहीं है। हमारी कार्रवाई जारी रहेगी।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।