comScore

विधानसभा में बढ़ी महिला विधायक, 39 को मिली थी उम्मीदवारी, दो निर्दलिय भी जीतीं 

October 24th, 2019 22:19 IST
विधानसभा में बढ़ी महिला विधायक, 39 को मिली थी उम्मीदवारी, दो निर्दलिय भी जीतीं 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र की चौदहवी विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस बार 23 महिला विधायक सदन में पहुंची हैं। जबकि 2014 में 20 महिला उम्मीदवारों को जीत मिली थी। बाद में हुए उपचुनावों में दो और महिला विधायक बनने में सफल रही थी। इस बार कुल 235 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरी थी। हर चुनाव की तरह इस विधानसभा चुनाव में भी आधी आबादी यानी महिला उम्मीदवारो को उम्मीदवारी देने में सभी दलों ने कंजूसी की थी। सत्ताधारी भाजपा ने सर्वाधिक 17 महिलाओ को उम्मीदवारी दी थी। हालांकि भाजपा की अधिकांश महिला उम्मीदवारों को राजनीतिक वंशवाद के चलते टिकट मिला था। इनमें से 12 चुनाव जीत गई है। भाजपा की सिटिंग महिला विधायकों में से मंदा म्हात्रे (बेलापुर), मनीषा चौधरी (दहिसर), विद्या ठाकुर (गोरेगांव), देवयानी फरांदे (नासिक सेंट्रल), सीमा हीरे (नासिक पश्चिम), माधुरी मिसाल (पार्वती), मोनिका राजले (शेवगांव) और भारती लवेकर (वर्सोवा) फिर से विधायक बनने में कामयाब रही हैं। जबकि  कांग्रेस विधायक प्रणति शिंदे (सोलापुर सिटी सेंट्रल), यशोमति ठाकुर (तिवसा) और वर्षा गायकवाड़ (धारावी-मुंबई) ने भी अपनी सीट बरकरार रखी है। पूर्व गृहमंत्री आरआर पाटील की पत्नी सुमन पाटिल तासगाव-कवठे से राकांपा के टिकट पर फिर से चुनाव जीत गई हैं।

इन्हें पहली बार मिली जीत

पहली बार विधानसभा चुनाव जीतने वाली महिला विधायकों में सरोज अहिरे (राकांपा) लता सोनवने (शिवसेना), यामिनी जाधव (शिवसेना) श्वेता महाले (भाजपा), मेघना बोरदीकर (भाजपा), नमिता मुंदडा (भाजपा), मुक्ता तिलक (भाजपा) और प्रतिभा धनोरकर (कांग्रेस) और सुलभा खोडके (राकांपा) शामिल हैं। इसके अलावा भाजपा की बागी उम्मीदवार गीता जैन (मीरा भायंदर) और मंजुला गावित ने साकरी से बतौर निर्दलिय उम्मीदवार जीत दर्ज की है। 

कम जीताऊ हैं महिला उम्मीदवार

पुरुष प्रधान भारतीय राजनीति में बगैर आरक्षण के महिला जनप्रतिनिधियों को स्वीकार करना लोगों के लिए मुश्किल होता है। 2014 के विधानसभा चुनाव मैदान में उतरी कुल 277 महिला उम्मीदवारों में से 20 ही विधानसभा पहुंच सकी थी। इनमें से अधिकांश बड़े नेताओं की रिश्तेदारी के चलते चुनाव जीत सकी थी। 2009 के विधानसभा चुनाव में  कुल 211 महिला उम्मीदवारों में से केवल 11 चुनाव जीत सकी थी। इसी तरह 2004 और 1999 में 12-12 महिला विधायक चुनी गई थी। इन चुनावों में केवल 5 फीसदी महिला उम्मीदवारों पर मतदाताओं ने विश्वास जताया। 
       
पार्टी     उम्मीदवारी    जीती

भाजपा      17            12
शिवसेना     8            02
कांग्रेस        8           03
राकांपा        6           03
निर्दलिय       -          02
वीबीए        6           01

कमेंट करें
ekb2t
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।