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अब भारतीय पैंगोलिन पर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों की नजर

अब भारतीय पैंगोलिन पर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों की नजर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अफ्रीका के कई देश हाथी दांत की अवैध तस्करी से जूझ रहे हैं। इन तस्करों पर रोक लगाने के लिए कई तरह की तकनीकों जैसे हाथी के दांत और उनके मल में मौजूद डीएनए से मारे गए हाथियों के मूल निवास स्थान का पता लगाया जा रहा है, ताकि उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके, जहां काफी बड़ी संख्या में हाथियों का शिकार किया जा रहा है। हाथी दांत के बड़े जखीरे के साथ काफी बड़ी मात्रा में पैंगोलिन के स्केल भी बरामद होने से साफ है कि इनका भी अवैध रूप से शिकार किया जा रहा है। स्केल के डीएनए विश्लेषण से पता चला है कि इनमें भारतीय भूभाग में पाए जाने वाले पैंगोलिन भी शामिल हैं। ये जानकारी डॉ. सैम्यूल वासर ने दी।

यूूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में बॉटनी विभाग में प्रोफेसर और सेंटर फॉर कंजर्वेशन के निदेशक डॉ. वासर रमन साइंस सेंटर में सेंटर व यूएस काउंसलेट जनरल, मुंबई के सहयोग से मंगलवार को आयोजित कम्बैटिंग वाइल्ड लाइफ ट्रैफिकिंग विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस तरह अफ्रीका में हाथी दांत के लिए बड़े स्तर हाथियों का अवैध रूप शिकार और व्यापार किया जा रहा है। इसके साथ ही इस पर रोक लगाने के लिए तकनीकी का उपयोग किस तरह से किया जा सकता है। 

डॉ. वासर के मुताबिक अवैध हाथी दांत व्यापार पर रोक थाम के लिए मारे गए छापों में 70 फीसदी मामलों में काफी बड़ी मात्रा में दांत बरामद होते हैं। सरकार का ध्यान हाथी के शिकार की ओर खींचने के लिए यह साबित करना जरूरी होता हैं कि बड़ी मात्रा में हाथी का शिकार किस क्षेत्र में किया जा रहा है। इसके लिए हाथियों के दांत और उनके मल से मिले डीएनए की मदद से उनकी पहचान की जाती है।  डॉ. वासर ने कहा कि पैंगोलिन के स्केल के डीएनए पहचान के दौरान उन्हें भारतीय क्षेत्र के पैंगोलिन के भी सबूत मिले हैं। उन्होंने कहा कि स्केल में मिलने वाले आैषधि तत्वों के कारण दुनिया भर में तेजी से पैंगोलिन का अवैध शिकार किया जा रहा है। इसके कारण उनकी संख्या तेजी से कम हो रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तस्करों की नजर भारत पर है। भारत सरकार को तत्काल इस ध्यान देने की जरूरत है।

डॉ. वासर ने अफ्रीका में हाथी दांत के लिए हाथियों के शिकार और दांत के अवैध व्यापार पर रोक लगाने में डीनए की पहचान के जरिए रोक लगाए जाने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अफ्रीका में हाथियों की संख्या तेजी से कम हो रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया में जारी व्यापार में वन्यजीवों के अंगों का अवैध व्यापार चौथा या पांचवां सबसे बड़ा व्यापार है। कुल 20 बिलियन डॉलर के इस व्यापार में हाथी के दांत के अवैध व्यापार का हिस्सा 4 बिलियन डॉलर है। इसके कारण अफ्रीका प्रति वर्ष चालीस हजार हाथी कम हो रहे हैं। फिलहाल वहां हाथियों की संख्या अब 4 लाख ही शेष रह गई है। 

 

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