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मालेगांव धमाका मामला : गवाहों की सुरक्षा को देखते हुए पत्रकारों के आवेदन पर न की जाए सुनवाई

मालेगांव धमाका मामला : गवाहों की सुरक्षा को देखते हुए पत्रकारों के आवेदन पर न की जाए सुनवाई

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मालेगांव बम धमाके मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए व गवाहों की सुरक्षा के उद्देश्य से हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की इन कैमरा सुनवाई के लिए आवेदन किया है। अभियोजन पक्ष प्रेस की स्वतंत्रता व अभिव्यक्ति की आजादी का पक्षधर है लेकिन मामले की संवेदनशीला व समाज में समरसता कायम रखने के लिए प्रकरण की इन कैमरा ट्रायल के विरोध में पत्राकरों की ओर से दायर किए गए आवेदन को खारिज कर दिया जाए। एनआईए ने मुंबई की विशेष अदालत में दायर किए गए हलफनामे में कोर्ट से यह आग्रह किया है। पुलिस उप अधीक्षक की ओर से पत्रकारों के आवेदन के जवाब में दायर किए गए इस हलफनामे में दावा किया गया है कि पत्रकारों के पास इस मामले की सुनवाई में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। पत्रकारों की ओर से इन कैमरा ट्रायर के विरोध में दायर किए गए आवेदन से न सिर्फ मामले की सुनवाई में विलंब होगा बल्कि इससे कोर्ट के कामकाज में भी व्यवधान पैदा होगा। 

एनआईए ने गवाहों की सुरक्षा को लेकर बांबे हाईकोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी के आधार पर मालेगांव बम धमाके से जुड़े मुकदमे की सुनवाई इन कैमरा किए जाने की मांग को लेकर कोर्ट में आवेदन दायर किया है। वैसे इन कैमरा सुनवाई  अनिवार्य नहीं है लेकिन अदालत गवाहों की सुरक्षा व उनकी पहचान को गुप्त रखने के लिए विशेष परिस्थितियों में अपने विशेषाधिकार के जरिए इन कैमरा ट्रायल का आदेश दे सकती है। एनआईए ने आवेदन में पत्रकारों द्वारा कही गई बातों को आधारहीन बताया है और मालेगांव मामले से जुड़ी संवेदनशील स्थिति के मद्देनजर पत्रकारों के आवेदन पर सुनवाई न करने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि मालेगांव बम धमाके मामले में भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,कर्नल प्रसाद पुरोहित सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। साल 2008 में हुए इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी जबकि सौ लोग घायल हो गए थे। 

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