comScore

मौसम विभाग को दगा देता रहा मौसम , अधिकांश भविष्यवाणी गलत साबित हुई

मौसम विभाग को दगा देता रहा मौसम , अधिकांश भविष्यवाणी गलत साबित हुई

डिजिटल डेस्क,नागपुर। शहर में इस साल मौसम में काफी बदलाव देखे गए। मौसम की आंखमिचौली व विभाग की घोषणा कुछ ज्यादा ही चर्चा में रही ।  गर्मी के मौसम में भी रिकार्ड तोड़ तापमान दर्ज हुआ। बारिश के दौर में कभी तेज बारिश, तो कभी न असहनीय गर्मी रही। पूर्वानुमान में मौसम वैज्ञानिक पूरी तरह फेल हो गए। 1 अगस्त से 18 सितंबर तक यानी करीब डेढ़ माह में 8 बार भारी बारिश या बिल्कुल बारिश नहीं हुई, जिसकी भविष्यवाणी की गई थी। मौसम की बिलकुल विपरीत ही प्रतिक्रिया देखने को मिली। जब रेड अलर्ट या ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी दी गई, तब धूप निकल आई और जब बारिश बंद होने की संभावना जताई गई, तो तेज फुहारों ने वैज्ञानिकों के विश्लेषण को गलत साबित कर दिया। मौसम विभाग की भविष्यवाणियां लगातार गलत साबित हो रही हैं। ऐसे में लगातार विभाग के अनुमानों पर सवाल उठ रहे हैं। हद तो तब हो गई जब इसी अनुमान के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा तक रद्द कर दिया गया, मगर उस दिन पूर्वानुमान के अनुसार कुछ भी नहीं हुआ। हालांकि अब मौसम विभाग की ओर से अधिकृत रूप से मानसून की विदाई की जानकारी दे दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार  9 अक्टूबर को मानसून की विदाई  हुई है।

ऐसे आती है रिपोर्ट

मौसम विभाग के वैज्ञानिक ग्लोबल स्थिति जैसे क्षेत्र पर, आस-पास मानसूनी विकास चक्रवात, प्रेशर, नमी और हवा की दिशाओं से अनुमान और विश्लेषण करते हैं। इसके बाद स्थिति को ग्लोबल फोरकास्टिंग मॉडल (जीएफएम) और फोरकास्टिंग यूरोपियन मॉडल (एफईएम) में डालते हैं। उसके बाद जो परिणाम आते हैं, वह ग्लोबल ही आते हैं। एक निर्धारित क्षेत्र के लिए परिणाम निकालने के लिए उसमें और विश्लेषण किया जाता है और फिर रिपोर्ट दी जाती है। विश्लेषण के आधार पर ही पुष्टि कर पुख्ता अधिकृत जानकारी साझा करते हैं। इसमें कभी-कभी मौसम में अचानक बदलाव के कारण पूर्वानुमान में अंतर आता है।

रिपोर्ट में 'कहीं कहीं' का करते हैं प्रयोग

हम जो भी रिपोर्ट देते हैं, वह पूरे जिले या एक बड़े क्षेत्र की देते हैं। रिपोर्ट में भी हम कहीं-कहीं पर भारी बारिश होने का अनुमान लिखते हैं। आज सभी तकनीक हमारे पास है और अनुभवी साइंटिस्ट हैं। पूर्वानुमान गलत नहीं होता है, यदि बारिश की चेतावनी है, तो क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बारिश होती ही है।
-एम.एल. साहू, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, मेटियोरोलॉजी

कमेंट करें
fjysh
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।