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मंत्रालय की दूसरी मंजिल की जाली में कूदकर आंदोलन, सरकारी नीति का किया विरोध

मंत्रालय की दूसरी मंजिल की जाली में कूदकर आंदोलन, सरकारी नीति का किया विरोध

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  दिव्यांगों के लिए चलाए जा रहे 300 स्थायी बिना अनुदानित स्कूलों को हमेशा के लिए बिना अनुदानित रखने की सरकारी की नीति से नाराज दो लोगों ने बुधवार को मंत्रालय की दूसरी मंजिल पर लगी जाली पर कूदकर आंदोलन किया। लोगों को जाली से बाहर निकालने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान रामाजिक न्यायमंत्री सुरेश खाडे के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

आंदोलन करने वाले लोगों के नाम हेमंत पाटील और अरुण नेतोरे है। पाटील चालीसगांव के एक संस्थाचालक और नेतोरे सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका में स्थित अपंग विद्यार्थियों के स्कूल के शिक्षक हैं। दोनों शिष्टमंडल के साथ मंत्रालय में अधिकारियों और संबंधित मंत्री से मुलाकात करने पहुंचे थे। लेकिन मंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों मंत्रालय की दूसरी मंजिल से ही उसकी जाली पर छलांग लगा दी। बता दें कि आत्महत्या की कई कोशिशों के बाद सरकार ने मंत्रालय की दूसरी मंजिल पर जाली लगा दी।

अब 5 हेक्टेयर तक के भूमि धारक किसानों को मिलेगा कृषि संजीवनी परियोजना का लाभ 

प्रदेश में विश्व बैंक की मदद से लागू की गई नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना का लाभ अब 2 से 5 हेक्टेयर तक के भूमि धारक किसानों को मिल सकेगा। अभी तक परियोजना का लाभ केवल अत्यल्प व अल्प भूधारक किसानों को मिल रहा था। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना के लिए संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार ने परियोजना के तहत किसानों को दिए जाने वाले अनुदान में भी बढ़ोतरी की है। इसके अनुसार परियोजना के माध्यम से गांव के अत्यल्प व अल्प भूधारक किसानों और भूमिहिन परिवार को दिए जाने वाले व्यक्तिगत लाभ की आर्थिक सहायता 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई है। जबकि 2 से 5 हेक्टेयर भूमिधारक किसानों को 65 प्रतिशत आर्थिक मदद दी जाएगी।

कृषि से जुड़े यंत्रों के लिए किसान समूहों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। विश्व बैंक की आर्थिक मदद से लगभग 4 हजार करोड़ रुपए खर्च करके यह परियोजना 15 जिलों में लागू की गई है। विदर्भ तथा मराठवाड़ा के सूखाप्रभावित और मौसम बदलाव के लिए अतिसंवेदनशील माने जाने वाले 4 हजार 210 गांव और विदर्भ के पूर्णा नदी के खारे पानी किनारे वाले 932 गांव कुल 5 हजार 142 गांव में नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना चलाई जा रही है। इसके तहत किसानों और कृषि क्षेत्र में सक्षम बनाने के लिए विभिन्न उपाय योजनाएं लागू की जाती हैं। 

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