दैनिक भास्कर हिंदी: 19 से थम सकते हैं स्कूल बसों के पहिए, कॉस्ट और शपथ-पत्र जमा करने के निर्देश

December 6th, 2017


डिजिटल डेस्क, नागपुर। कास्ट और शपथपत्र जमा न करने वाली स्कूलों की बसों के पहिए 19 से थम सकते हैं। इस संदर्भ में 18 दिसंबर तक का समय दिया गया है। दरअसल  बस सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाली स्कूलों पर हाईकोर्ट का डंडा चला है। इस मुद्दे पर केंद्रित जनहित याचिका पर जवाब देने से बच रही 52 स्कूलों के खिलाफ हाईकोर्ट ने 5 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई थी। मंगलवार को भी स्कूलों का जवाब नहीं आने पर नाराज हाईकोर्ट ने उन पर कुल 10 हजार रुपए की कॉस्ट लगाकर बस सुरक्षा मापदंड का पालन करने का शपथपत्र 18 दिसंबर तक जमा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है िक अगर 18 दिसंबर तक हर हाल में स्कूलों ने कॉस्ट और शपथपत्र जमा नहीं किया, तो 19 दिसंबर से उनकी स्कूल बसें प्रतिबंधित कर दी जाएंगी। नागपुर आरटीओ को प्रतिबंधित बसें न दौड़ पाएं, इसका ध्यान रखना होगा। आदेश जारी होते वक्त हाईकोर्ट में आरटीओ शरद जिचकार भी उपस्थित थे। 
समिति को दी थी जिम्मेदारी
दरअसल 9 जनवरी 2013 को स्कूल बस से उतरते वक्त बस की चपेट मंे आ जाने से विरथ झाड़े नामक बच्चे की मौत हो गई थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वयं जनहित याचिका दायर की थी। पूर्व में याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यातायात आयुक्त को राज्यभर में जिला स्तर पर और शाला स्तर पर समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। समितियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा था कि, स्कूली विद्यार्थियों को लाने-ले-जाने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव किया जा रहा है या नहीं। साथ ही विद्यार्थियों की यातायात सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
स्कूलों ने की अनदेखी
न्यायालयीन मित्र फिरदौस मिर्जा ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि, ये तमाम स्कूल बस सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। राज्य में करीब 12 हजार स्कूल बसों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने इन स्कूलों से जवाब मांगा था, लेकिन स्कूल बार-बार जवाब देने से बच रहे थे। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने बीते दिनों बस सुरक्षा नियमों की पूर्ति नहीं करने वाली 137 स्कूलों पर पांच-पांच हजार रुपए जुर्माना लगाकर नोटिस जारी किया था।  जिसमें से करीब 85 स्कूलों ने हाईकोर्ट में जवाब दिया है। शेष स्कूलों के प्रति हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है।