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डीवीआर तो मिला , चोर का नहीं लगा सुराग

डीवीआर तो मिला , चोर का नहीं लगा सुराग

डिजिटल डेस्क, नागपुर। ईवीएम की निनगरानी के लिए लगाए गए डिजिटल उपकरणों की चोरी के मामले की शिकायत की जांच के लिए मुख्य चुनाव आयोग के दो सदस्य उमरेड पहुंचे। आयोग के सदस्यों ने स्थानीय निर्वाचन अधिकारी, पुलिस व राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों से पूछताछ की।  विविध विषयों पर पूछताछ के बाद आयोग के सदस्य दिल्ली रवाना हो गए। 

अचानक डीवीआर मिलने से पुलिस की भूमिका पर सवाल
इस बीच अचानक डीवीआर मिलने के घटनाक्रम को लेकर सभी आश्चर्य जता रहे हैं। पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का दावा है कि, डीवीआर की खोजबीन के लिए 21 घरों में छानबीन की गई। 70 लोगों से पूछताछ भी की गई, लेकिन अहम सवाल बना है कि भले ही डीवीआर मिल गया पर उसे चुराने वाले चोर तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पायी है। पर्यवेक्षक के तौर पर उमरेड पहुंचे चुनाव आयोग की टीम के सदस्यों के नाम मधुसूदन गुप्ता व भंवरलाल बताए गए हैं। बताया गया है कि, चुनाव आयोग की ओर से स्थानीय चुनाव अधिकारियों से क्रॉस क्वेश्चन किए गए। इस दौरान विविध मामलों पर स्थानीय चुनाव अधिकारी बचाव की भूमिका में थे। 

क्या है मामला
लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र स्तर पर ईवीएम रखने के लिए अस्थायी स्ट्रांग रूम बनाए गए थे। ऐसे ही उमरेड के आईटीआई परिसर में बनाए गए स्ट्रांग रूम से डीवीआर चोरी का मामला सामने आया। कांग्रेस उम्मीदवार व नेताओं ने सूचना के आधार पर आरोप लगाया कि ईवीएम की निगरानी के लिए रखे गए डीवीआर चोरी हाेने से ईवीएम में छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। डीवीआर 13 से 15 मई के बीच चोरी हुआ। 11 अप्रैल को मतदान हुआ था। कांग्रेस के आरोप पर प्रशासन की ओर से कहा गया था कि, ईवीएम सुरक्षित है। 12 अप्रैल की दोपहर को सभी दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ईवीएम को कलमना स्ट्रांग रुम में पहुंचाया गया है।

चोरी गया डीवाआर उमरेड स्ट्रांग रूम परिसर में पुलिस के स्ट्रांग रूम के लिए लगाया गया था। मामले की शिकायत दिल्ली पहुंची। मुख्य चुनाव आयोग ने जांच दल भेजने को कहा, तब शनिवार को सुबह अचानक स्ट्रांग रूम में डीवीआर मिल गया। कहा गया कि, चोर ही वहां डीवीआर छोड़ गया। हमारे उमरेड संवाददाता के अनुसार रविवार की सुबह 10.30 बजे चुनाव आयोग के सदस्य उमरेड पहुंचे। जिलाधिकारी अश्विन मुद्गल, रामटेक लोकसभा के निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत फडके, पुलिस अधीक्षक राकेश ओला, ग्रामीण अपराध शाखा के निरीक्षक संजय पुरंदरे, तकनीकी विशेषज्ञ, श्वान पथक व फारेंसिक लैब के विशेषज्ञ भी जांच दल के साथ पहुंचे थे। 

जांच से संतुष्ट हूं 
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने यहां आकर जिस तरह से पूछताछ व जांच की उससे हम संतुष्ट हैं। पुलिस व स्थानीय प्रशासन की लापरवाही साफ तौर पर सामने आयी है। चुनाव आयोग ने जांच की शुरूआत की तब ही स्थानीय प्रशासन ने भी जांच प्रक्रिया शुरू की है। यहां के अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा है।
- किशोर गजभिये, कांग्रेस उम्मीदवार, रामटेक लोकसभा

 

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