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हाईकोर्ट : दीपक बजाज की स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगी, अड़सड़ पिता-पुत्र की जांच अपराध शाखा को सौंपने का निर्देश

हाईकोर्ट : दीपक बजाज की स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगी, अड़सड़ पिता-पुत्र की जांच अपराध शाखा को सौंपने का निर्देश

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पूर्व विधायक अरुण अड़सड़ और धामणगांव रेलवे के भाजपा उम्मीदवार प्रताप अड़सड़ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों पर दर्ज धोखाधड़ी के प्रकरण की जांच हाईकोर्ट ने अपराध शाखा के अधीक्षक को सौंपने के आदेश जारी किया हैं। गोपाल अग्रवाल ने अड़सड़ पिता, पुत्र व उनकी बेटी के खिलाफ धामणगांव रेलवे पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया गया है। पूर्व में अड़सड़ पिता-पुत्र को सत्र न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया था। इधर अग्रवाल ने दोनों के राजनीतिक दबाव के चलते जांच प्रभावित होने का मुद्दा हाईकोर्ट में उठाया था। इस याचिका पर सभी पक्षों की सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपी है। याचिकाकर्ता की ओर से एड.राहिल मिर्जा ने पक्ष रखा। 


दीपक बजाज की स्वास्थ्य रिपोर्ट दो 

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने मुंबई के जेजे अस्पताल के सिविल सर्जन को दो सप्ताह में दीपक बजाज की स्वास्थ्य रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। तब तक कोर्ट ने बजाज की अंतरिम जमानत बढ़ा दी है। बता दें कि, आर्थिक अनियमितताओं में घिरे सिंधु एजुकेशन सोसायटी के सचिव दीपक बजाज स्वास्थ्य कारणों से  अंतरिम जमानत पर है। हाईकोर्ट ने हार्ट ऑपरेशन के लिए बजाज को 1 जुलाई को अंतरिम जमानत दी थी। अवधि पूरी होनेे के बाद बजाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुबोध धर्माधिकारी और एड. उदय डबले ने कोर्ट को बताया था कि, ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बजाज को आराम की सलाह दी है। ऐसे में उन्हें कुछ दिनों की और जमानत दी जाए, जिसके बाद कोर्ट ने बजाज की अंतरिम जमानत बढ़ा दी थी। अब कोर्ट ने चिकित्सकों को बजाज की स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगी है।  बता दें कि, हाईकोर्ट के आदेश के बाद निचली अदालत मंे बजाज के खिलाफ ट्रायल जारी है। उस पर आय से अधिक संपत्ति रखने और अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। महात्मा गांधी स्कूल के प्राचार्य पद पर रहते हुए पद-दुरुपयोग का भी मामला बजाज के खिलाफ दर्ज है। जरीपटका थाने में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (1)(ई), 13 (2), 13 (1)(डी) के तहत बजाज के खिलाफ अपराध दर्ज है।


सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर निर्णय ले प्राधिकरण

इसके अलावा वाड़ी क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के मुद्दे पर सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सुनवाई हुई। महाराष्ट्र जीवन विकास प्राधिकरण ने बताया कि, यह प्रस्ताव उनके पास विचाराधीन है। प्रस्ताव के तकनीकी पहलुओं पर विचार किया जा रहा  है। ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन के विषय पर भी कोर्ट में बहस हुई। वाड़ी नगर परिषद ने दावा किया कि, जमीन तो उनके पास है, लेकिन उसका अधिग्रहण का कार्य अभी बाकी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनकर जीवन विकास प्राधिकरण को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी देने पर जल्द निर्णय लेने को कहा है। इधर जिलाधिकारी को भी चुनाव के बाद जमीन अधिग्रहण पर निर्णय लेने को कहा गया है। वाड़ी में ट्रीटमेंट प्लांट का लगना जमीन अधिग्रहण पर निर्भर करेगा। उल्लेखनीय है कि, बगैर प्रोसेस किए ही उद्योगों के रसायनयुक्त पानी को अंबाझरी तालाब में छोड़ा जा रहा था। नजदीकी रिहायशी इलाकों से भी प्रदूषित जल अंबाझरी में मिल रहा था। वाड़ी नगर परिषद मंे सीवेज ट्रीटमंेट प्लांट नहीं होने से सीवेज का सारा पानी तालाब में मिल रहा था। इससे समय के साथ-साथ तालाब में ऑक्सीजन की कमी हो गई, जिससे मछलियां मरने लगीं। तालाब के किनारे जब मरी हुईं मछलियों का ढेर इकट्ठा हुआ, तो यह मुद्दा चर्चा में आया। ऐसे में हाईकोर्ट में वाड़ी में सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट बनाने के मुद्दे ने जोर पकड़ा। इसके लिए वाड़ी नगर परिषद ने 52 लाख रुपए जीवन विकास प्राधिकरण को दिए हैं। तकनीकी मान्यता मिलना शेष है। मामले में नासुप्र की ओर से एड. गिरीश कुंटे, परिषद की ओर से एड. मोहित खजांची और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एड. एस.एस सान्याल ने पक्ष रखा।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।