दैनिक भास्कर हिंदी: मेडिकल व सुपर स्पेशलिटी में ऑक्सीजन प्लांट तैयार, सीधे वार्ड और आपरेशन थिएटर में सप्लाई

June 1st, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शासकीय मेडिकल अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अब ऑक्सीजन बाहर से लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दोनों अस्पतालों में स्वतंत्र ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो गए हैं। प्लांट के संचालन का निरीक्षण कर लाइसेंस भी जारी कर दिए गए हैं। ऑक्सीजन के लिए आवश्यक लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बुटीबोरी एमआईडीसी से ऑक्सीजन लिक्विड की आपूर्ति की जाएगी। इसे प्लांट में भरकर वेपराइज सिस्टम से तैयार हुई ऑक्सीजन प्लांट से सीधे वार्ड और ऑपरेशन थिएटर में सप्लाई होगी। मेडिकल में 20 केएल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 10 केएल ऑक्सीजन प्लांट बनाए गए हैं। 99 लाख 47 हजार 447 रुपए की लागत से निर्मित दोनों प्लांट के लिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से निधि आवंटित की गई है।

चार प्रकार की गैस का उत्पादन
ऑपरेशन थिएटर में चार प्रकार की गैस की जरूरत पड़ती है। इन चारों गैस का ऑक्सीजन प्लांट में उत्पादन होगा। इसमें ऑक्सीजन, नाइट्रस ऑक्साइड, वैकूम सक्सेसन और काम्प्रेस्ड एयर सिस्टम का समावेश है। ऑपरेशन थिएटर में गैस पहुंचाने के लिए 4 प्रकार की पाइप लगाई गई है। उसी तरह भर्ती वार्ड में 3 प्रकार की गैस की जरूरत पाइप के माध्यम से पूरी की जाएगी। फिलहाल सिलेंडर को सप्लाई यूनिट से जोड़कर पाइप के माध्यम से सप्लाई की जा रही है। प्लांट शुरू होने के बाद सप्लाई यूनिट को जोड़ा जाएगा।

ट्रांसपोर्टिंग खर्च की होगी बचत
मेडिकल में फिलहाल बुटीबोरी एमआईडीसी से ऑक्सीजन सलेंडर लाए जाते हैं। प्लांट बनने के बाद केवल लिक्विड ऑक्सीजन का टैंकर लाना पड़ेगा। इसका उपयोग ऑक्सीजन गैस बनािने के लिए प्लांट में होगा। सिलेंडर भरकर लाने और खाली सिलेंडर वापस पहुंचाने की झंझट नहीं रहेगी। सिलेंडर लाने-ले-जाने पर होने वाले ट्रांसपोर्टिंग खर्च की बचत होगी।

पर्याप्त ऑक्सीजन मिलेगी
मेडिकल अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीज आते हैं। इसमें से सैकड़ों मरीज रोज भर्ती होते हैं। अनेक मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। प्लांट से पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध होगी।  फिलहाल बुटीबोरी से ऑक्सीजन सिलेंडर लाए जाते हैं। ट्रांसपोर्टिंग तथा अन्य कारण से समय पर सिलेंडर नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन खत्म होने पर समस्या होती है। अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने पर यह समस्या खत्म हो जाएगी। 
डॉ. नरेश तिरपुड़े, विभाग प्रमुख एनेस्थीसिया
 

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