आश्वासन: मुकदमे के निपटारे तक वानखेड़े परिवार के बारे में नहीं बोलेंगे नवाब मलिक

November 29th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के क्षेत्रिय निदेशक समीर वानखेडे के पिता ज्ञानदेव की ओर से राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ दायर मानहानि के दावे पर बांबे हाईकोर्ट में नए सिरे से सुनवाई होगी। लेकिन जब तक इस दावे का निपटारा नहीं हो जाता है तब तक मंत्री मलिक वानखेडे के परिवार को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी, ट्विट व सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करेंगे। 

इससे पहले हाईकोर्ट ने मंत्री मलिक व ज्ञानदेव की सहमति के बाद एकल न्यायमूर्ति के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसके तहत मंत्री मलिक के वानखेडे के परिवार के खिलाफ बोलने व सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोकने से मना कर दिया गया था। लिहाजा अब इस पूरे मामले की एकल न्यायमूर्ति के सामने नए सिरे से सुनवाई होगी। इस दौरान मलिक के वकील ने भी खंडपीठ को आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल मामले का निपटारा होने तक वानखेडे व उनके परिवार के बारे में सार्वजनिक रुप से अथवा सोशल मीडिया पर कुछ नहीं कहेंगे। 

इसके पहले बीते 22 नवंबर 2021 को न्यायमूर्ती माधव जामदार ने मंत्री मलिक पर वानखेड़े परिवार के खिलाफ बोलने पर रोक लगाने से मना कर दिया था। इस आदेश को ज्ञानदेव ने न्यायमूर्ति एसजे काथावाला व न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की खंडपीठ के सामने चुनौती दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मंत्री मलिक के रुख पर नाराजगी जाहिर की थी। खंडपीठ ने कहा था कि ‘क्या मंत्री के रुप में मलिक को यह शोभा देता है। क्या उन्होंने वानखेडे के जाति प्रमाणपत्र को लेकर जाति वैधता प्रमाणपत्र से जुड़ी कमेटी के सामने शिकायत की हैॽ’ इसका उत्तर मलिक के वकील ने ना में दिया था। 

एकल न्यायमूर्ति का फैसला रद्द  

सोमवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो दोनों पक्षों के वकीलों ने मामले को लेकर एकल न्यायमूर्ति की ओर से दिए गए आदेश को रद्द करने को लेकर सहमति जताई। इसके बाद खंडपीठ ने एकल न्यायमूर्ति के आदेश को खारिज कर दिया और मलिक को मानहानि के दावे के निपटारे तक वानखेडे व उनके परिवार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर व सोशल मीडिया में कुछ न बोलने को कहा है। खंडपीठ ने मलिक को मानहानि के दावे को लेकर विस्तार से अपना जवाब देने का निर्देश दिया है।