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एनजीटी ने अमरावती मनपा पर लगाया 1 करोड़ का जुर्माना, घनकचरा अधिनियम का किया उल्लंघन

एनजीटी ने अमरावती मनपा पर लगाया 1 करोड़ का जुर्माना, घनकचरा अधिनियम का किया उल्लंघन

डिजिटल डेस्क, अमरावती । 8 लाख की आबादी वाले अमरावती शहर से निकलने वाले कचरे को रोजाना सुकली कम्पोस्ट डिपो में डम्प किया जा रहा हैै। विगत कई वर्षों से मनपा व्दारा घनकचरा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस संदर्भ में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित लवाद) में दाखिल जनहित याचिका पर 15 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए एनजीटी ने मनपा ने 1 करोड़ रुपए का जुर्माना सुनाया है। साथ ही आवश्यक निर्देश भी दिए है।

उल्लेखनीय है कि पर्यावरण प्रेमी गणेश अनासाने ने विगत 7 अगस्त को एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिसमें कहा गया कि मनपा ने कम्पोस्ट डिपो के लिए मिहान एअरपोर्ट अथॉरिटी को गुमराह करते हुए कम्पोस्ट डिपो के लिए एनओसी लाई थी किंतु आज तक घनकचरा व्यवस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नियम के मुताबिक एअरपोर्ट के 20 किमी के दायरे में कम्पोस्ट डिपो नहीं होना चाहिए।   बेलोरा हवाई अड्डा सुकली कम्पोस्ट डिपो से 20 किलोमीटर से कम की दूरी पर है। विगत कई वर्षों से मनपा व्दारा घनकचरा अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है।

शहर से कचरा लेकर कम्पोस्ट डिपो जाने वाले वाहन भी खुले रहते हैैं। इन वाहनों के दस्तावेज भी ठीक से उपलब्ध नहीं हैै। यहां तक कि मेडिकल से निकलने वाले जैव-रासायनिक कचरे की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हर मामले में मनपा ने नियमों का उल्लंघन किया है। जिसके बाद एनजीटी ने 22 अगस्त को निगमायुक्त, जिलाधीश के साथ ही प्रदूषण मंडल को नोटिस जारी करते हुए एक माह में रिपोर्ट मंगवाई। 1 सितंबर को जिलाधीश, निगमायुक्त व प्रदूषण मंडल के अधिकारियों ने कम्पोस्ट डिपो  का जायजा लेते हुए 19 सितंबर को संयुक्त रिपोर्ट पेश की। जिसके बाद 15 को एनजीटी व्दारा की गई सुनवाई में कहा गया है कि विगत 3 दशकों से सुकली कम्पोस्ट डिपो पर कचरा डाला जा रहा है। जिसमें घनकचरा व्यवस्थापन नियम 2016 का उल्लंघन किया गया है।

अमरावती मनपा 6 माह की कालावधी में घनकचरा व्यवस्थापन सुविधा स्थापना की प्रक्रिया गति से करें। कम्पोस्ट डिपो पर डम्प किया गया कचरा हटाने का काम शीघ्र शुरू किया जाएं। दो माह की कालावधी में यह काम पूर्ण करना होगा। कम्पोस्ट डिपो पर दो लाख टन घनकचरा जमा हुआ है। प्रक्रिया करते समय मनपा इंदोर, पीनारा व अहमदाबाद के मॉडल का उदाहरण ले सकते है। विगत 20-30 वर्षों से पर्यावरण का जो नुकसान हुआ है, उसके लिए एक करोड़ रुपए नुकसान भरपाई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल को देनी होगी। इसके अलावा पर्यावरण का कुल नुकसान भरपाई का मूल्यांकन राज्य एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल व्दारा किया जाएगा। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का पालन करने में मनपा असफल रहती है तो संबंधित अधिकारियों के विरोध में जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।

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