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अब विदर्भ में कोयला आधारित औष्णिक विद्युत प्रकल्प नहीं आएंगे-ऊर्जामंत्री बावनकुले

अब विदर्भ में कोयला आधारित औष्णिक विद्युत प्रकल्प नहीं आएंगे-ऊर्जामंत्री बावनकुले

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विदर्भ राज्य आंदोलन समिति की ओर से विदर्भ के किसान और बिजली समस्या को लेकर ‘विद्युत मार्च’ निकालने की घोषणा को ऊर्जामंत्री ने गंभीरता से लेते हुए समिति को तत्काल बातचीत के लिए आमंत्रित किया और उनकी चार में दो मांगों को तत्काल मंजूर कर आंदोलन स्थगित करने का निवेदन किया। इस अनुसार विदर्भ में कोयला आधारित औष्णिक विद्युत प्रकल्प नहीं आएगे। किसानों पर लादी गई सौर कृषि पंप की सख्ती भी पीछे लेने का आश्वासन ऊर्जामंत्री द्वारा देने की जानकारी समिति के मुख्य संयोजक राम नेवले ने दी। 

विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने ली दखल
विदर्भ में घरेलू व व्यावसायिक उपयोग के विद्युत दर आधी करने, किसानों को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति करने, कृषि पंपों का अनुशेष दूर करने, सौर कृषि पंप की सख्ती पीछे लेने, विदर्भ का प्रदूषण शून्य पर लाने के लिए कोयला आधारिक औष्णिक विद्युत प्रकल्प को विदर्भ से बाहर ले जाने जैसी प्रमुख मांग विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने की थी। इन मांगों को लेकर सोमवार 3 जून को संविधान चौक से कोराड़ी तक विद्युत मार्च आयोजित किया गया था, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इसकी दखल ली। 1 जून को ऊर्जामंत्री बावनकुले ने विद्युत भवन के विश्रामगृह में समिति के 15 प्रतिनिधियों के शिष्टमंडल से चर्चा की। चर्चा में चार में से दो मांग तत्काल मान्य की गई।

निर्णय लेते हुए ऊर्जामंत्री ने आश्वास्त किया कि नए औष्णिक विद्युत प्रकल्प विदर्भ में नहीं लाएंगे। पुराने विद्युत निर्मिति केंद्रों का आधुनिकीकरण कर नई तकनीक के आधार पर प्रदूषण को रोका जाएगा। विदर्भ में 4 लाख 41 हजार कृषि पंपों का अनुशेष तत्काल भरा जाएगा और किसानों पर सौर कृषि पंपों की सख्ती को रद्द किया जाएगा। समिति के संयोजक राम नेवले ने बताया कि इस दौरान ऊर्जामंत्री ने 1 अप्रैल 2018 से कृषि पंपों के कनेक्शन पर लगाई गई बंदी तत्काल उठाने के आदेश दिए हैं। पत्र-परिषद में एड. वामनराव चटप, डॉ. श्रीनिवास खांदेवाले, रंजना मामर्डे, प्रबीरकुमार चक्रवर्ती, धर्मराज रेवतकर, मुकेश मासुरकर, विजया धोटे, गणेश शर्मा उपस्थित थे।  

दो मांगों पर सकारात्मक रुख 
एड. वामनराव चटप ने कहा कि विद्युत दर कम करने और किसानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने सहित किसानों के बकाया बिल माफ करने की मांग पर ऊर्जामंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया है। इस मांग पर निर्णय का अधिकार एमईआरसी और राज्य मंत्रिमंडल के पास होने से इस तरह का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने रखने का आश्वासन ऊर्जामंत्री ने दिया है। 

30 जून तक आंदोलन स्थगित 
एड. वामनराव चटप और डॉ. श्रीनिवास खांदेवाले ने ऊर्जामंत्री से हुई बातचीत पर समाधान व्यक्त कर आंदोलन रद्द न करते हुए 30 जून तक स्थगित करने की जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद मंत्रिमंडल में तकनीकी समस्या सुलझाने के लिए 30 जून तक समय दिया गया है। इस दौरान समस्या का समाधान नहीं होता है, तो ऊर्जामंत्री के निवास पर विद्युत मार्च निकाला जाएगा।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।