दैनिक भास्कर हिंदी: मेडिकल में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा, हाईकोर्ट ने कहा-सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई का अधिकार

June 13th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। वर्ष 2018-19 की एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया में ओबीसी प्रवर्ग के विद्यार्थियों को ऑल इंडिया कोटा में आरक्षण से वंचित रखे जाने का मुद्दा उठाती अखिल भारतीय ओबीसी महासंघ की याचिका पर नागपुर खंडपीठ ने अपना फैसला सुना दिया है। हाईकोर्ट ने साफ कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक इस तरह के विषयों पर केवल सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हो सकती है, अन्य किसी अदालत को इस पर सुनवाई के अधिकार नहीं है। ऐसे में नागपुर खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को सर्वोच्च न्यायालय जाने की छूट दी है।

याचिकाकर्ता की प्रार्थना थी कि देश भर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए जो ऑल इंडिया सेंट्रल गवर्नमेंट कोटा तय होता है, ओबीसी प्रवर्ग के विद्यार्थियों को इस कोटे पर भी 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। अन्य राज्यों में जहां इसे लागू किया गया है, महाराष्ट्र सरकार ऐसा नहीं कर रही है। इस याचिका में प्रतिवादी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, केंद्रीय सामाजिक न्याय विभाग, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और राज्य चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से एड. पुरुषोत्तम पाटील ने पक्ष रखा।

यह है मामला

याचिकाकर्ता ओबीसी महासंघ और छात्रा राधिका राउत के अनुसार, छात्रा राधिका राउत ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 6 मई को हुई नीट परीक्षा दी थी। इसमें उसे कुल 473 अंक मिले थे। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए आरक्षण नीति से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस आरक्षण नीति के अनुसार मेडिकल प्रथम वर्ष प्रवेश में 27 प्रतिशत सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित थीं।

याचिकाकर्ता का दावा था कि महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों में ऑल इंडिया सेंट्रल गवर्नमेंट कोटा के तहत ओबीसी विद्यार्थियों को 15 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।  मगर महाराष्ट्र सरकार ने अपने विद्यार्थियों के लिए ऑल इंडिया सेंट्रल गवर्नमेंट कोटा केवल 1.7 प्रतिशत (69 सीट) तक सीमित कर दिया। प्रदेश में सेंट्रल गवर्नमेंट कोटा के तहत 27 प्रतिशत आरक्षण की नीति भी लागू नहीं की गई। इसी कारण से ऑल इंडिया कोटा की 464 सीटों मंे से एक भी सीट ओबीसी प्रवर्ग के लिए आरक्षित नहीं हो सकी। याचिकाकर्ता के अनुसार, महाराष्ट्र में ओबीसी प्रवर्ग के विद्यार्थियों को ऑल इंडिया सेंट्रल गवर्नमेंट कोटा की सीटों में भी 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। तामिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल मंे ऐसा हुआ था। 

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