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पांच साल में काटे गए एक करोड़ पेड़, जानिए किस प्रोजेक्ट के कितने काटे

पांच साल में काटे गए एक करोड़ पेड़, जानिए किस प्रोजेक्ट के कितने काटे

डिजिटल डेस्क, नागपुर। हाल ही में मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए  आरे के जंगल काटे जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। देश में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स और योजनाओं के लिए पिछले 5 वर्षों में एक करोड़ से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। अभी 3.5 लाख से अधिक पेड़ और काटे जाने हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की मंजू मेमन और पर्यावरणविद् मीनाक्षी नाथ ने यह जानकारी फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी के विभिन्न मिनट्स, आरटीआई और विभिन्न अध्ययन से जुटाई है। वहीं जुलाई 2019 में सरकार ने लोकसभा में भी माना कि पिछले पांच साल में एक करोड़ नौ लाख पेड़ काटे गए हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग के अनुसार देश के जंगलों में 1,365 करोड़ 84 लाख 54 हजार और जंगलों के बाहर 583 करोड़ 37 लाख 51 हजार पेड़ हैं। यानी कुल 2,048 करोड़ पेड़। दिल्ली ट्रीज एसओएस कैंपेन और माइ राइट टू ब्रीद जैसे अभियानों से जुड़ी पर्यावरणविद् मीनाक्षी नाथ बताती हैं कि अब तक विभिन्न प्रोजेक्ट्स में 3 लाख 61 हजार 644 पेड़ काटे (एक करोड़ नौ लाख पेड़ के अलावा) जा चुके हैं। वहीं भारत माला परियोजना और राज्य सरकारों द्वारा हाइवे के विस्तार जैसी योजनाओं में 3.5 लाख से अधिक पेड़े और काटे जाएंगे। वे बताती हैं कि उन्होंने पर्यावरण और पेड़ों को बचाने के लिए काम करने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक अनुमानित डेटा भी इकट्ठा किया है। 

महाराष्ट्र के महत्वाकांक्षी मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे के लिए ही करीब 11 लाख पेड़ काटे जाने वाले हैं। हालांकि महाराष्ट्र में मुंबई से नागपुर तक बन रहे समृद्धि एक्सप्रेसवे के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राधेश्याम मोपलवार बताते हैं कि हमने वन व पर्यावरण विभाग की मंजूरी के बाद ढ़ाई लाख पेड़ काटे हैं।  मोपलावर कहते हैं कि इसके बदले हम साढ़े तीन गुना अधिक यानी 8 लाख 65 हजार पेड़ लगाने वाले हैं। सिटीजन फॉर बेंगलुरु की को-फाउंडर तारा कृष्णास्वामी भी मुंबई में चल रहे सेव द आरे जैसे पेड़ों को बचाने वाले एक दूसरे मूवमेंट की प्रमुख हैं। वे बताती हैं कि हम लोगों ने सिटीजन फॉर बेंगलुरु के नाम पर ‘नो स्टील फ्लाइओवर’ नामक आंदोलन शुरू कर बेंगलुरु के करीब दो हजार पेड़ों को कटने से बचा लिया। सरकार ने प्रस्तावित स्टील फ्लाइओवर को रद्द कर दिया।


किस प्रोजेक्ट के लिए कितने पेड़ काटे
प्रोजेक्ट                                              पेड़ काटे गए

{दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे                         22,027
{पूर्वांचल एक्सप्रेसवे                               36,574
{दिल्ली-बडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे             30,786
{नॉर्दर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे                   13,960
{चेन्नई पोर्ट                                          4,797
{मुंबई-नागपुर सुपर कम्यु. एक्सप्रेसवे     2,50,000
{उत्तर भारत हाइवे का विस्तारीकरण     3,500
{कुल                                                3,61,644

सोर्स- फोरेस्ट्स एडवाइजरी के मिनट्स, आरटीआई, अन्य सरकारी दास्तावेज से लिए गए हैं। (ये सरकार द्वारा बताए 1 करोड़ 9 लाख पेड़ों के अलावा हैं)

 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।