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हाईकोर्ट: विवाह स्थल के निकट पटाखे से होनेवाले शोर से जुड़े मामले को देखें पुलिस आयुक्त

January 12th, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण कानून का उद्देश्य लोगों को ध्वनि प्रदूषण से बचाना है। लिहाजा पुणे के पुलिस आयुक्त विवाह स्थल के निकट रात दस बजे के बाद तेज आवाज वाले पटाखे फोड़ने के कारण होनेनवाले शोर से जुड़ी शिकायत पर गौर करने के बाद उस पर उचित आदेश जारी करे। हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अरविंद पाटिल की ओर से कोर्ट में दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। याचिका में मांग की गई है कि रात दस बजे से सुबह 6 बजे के बीच पटाखे फोड़नेवाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। क्योंकि रात दस बजे के बाद तेज आवाज वाले पटाखे फोड़ना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन है। 

मामला पुणे के निकट बिबेवाडी इलाके से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक इस इलाके में स्थित यश लॉन के निकट फोडे गए पटाखे के चलते मेरे मुवक्किल को रात में काफी परेशानी हुई है। इस बारे में उन्होंने स्थानीय पुलिस में भी शिकायत की थी। लेकिन इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने कोई कार्रवार्ई नहीं की। लिहाजा पाटिल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

न्यायमूर्ति पीबी वैराले व न्यायमूर्ति अनिल किलोर की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान पाटिल की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता उदय वारुंजेकर ने कहा कि मेरे मुवक्किल ने दो साल पहले पुलिस में इस संबंध में शिकायत की थी। शिकायत के साथ एक वीडियों भी दिया था। लेकिन फिर भी पुणे पुलिस की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ समय बाद जब मेरे मुवक्किल ने अपनी शिकायत को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उन्हें पता चला कि मामले की जांच को बंद कर दिया गया है। सिर्फ यश लॉन के मालिक को इस मामले में उचित कदम उठाने के लिए कहा गया है। वारुंजेकर ने कहा कि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर इस मामले में खानापूर्ति की है।

इन दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण कानून का उद्देश्य लोगों को ध्वनि प्रदूषण से बचाना है। खंडपीठ ने पुणे पुलिस को याचिकाकर्ता की शिकायत को देखने को कहा है। और उस पर आठ सप्ताह के अंदर उचित आदेश जारी करने का निर्देश दिया है। 


 

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