दैनिक भास्कर हिंदी: नक्सलियों को जड़ से खत्म करने पुलिस ने खाई कसम

April 27th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। गड़चिरोली जिले में एक सप्ताह में 39 नक्सलियों को मार गिराने वाले पुलिस दल के सी-60 जवानों की बहादुरी को नक्सली हमले में शहीदों की विधवाओं ने सलाम किया। उन्होंने कहा कि गड़चिरोली पुलिस ने नक्सली गतिविधियों को जड़ से मिटाने की कसम खाई है, इसका हमें अभिमान है। रक्तपात समस्या का समाधान नहीं हो सकता, परंतु जवाबी कार्रवाई में पुलिस को हथियार चलाने पड़ते हैं। यह नौबत ही नहीं आने पाए, इसलिए उन्होंने नक्सली गतिविधियों में लिप्त लोगों से हथियार डालकर समाज के मुख्य प्रवाह में आने का अाह्वान प्रेस कांफ्रेंस में किया।

नक्सली नहीं चाहते विकास
नक्सली हमले में शहीद की विधवा जानकी शहीद पुलिस परिवार विविध वस्तु व सेवा सहकारी संस्था की अध्यक्ष हेमलता वाघाड़े ने कहा कि गड़चिरोली जिले में नक्सली गतिविधियों से विकास अवरुद्ध हुआ है। विकास कार्यों को अवरुद्ध कर नक्सली, आदिवासियों को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखने का काम कर रहे हैं। विकास से कोसो दूर जिले के अनेक हिस्सों में शिक्षा की सुविधा नहीं है। रोजगार के साधन नहीं रहने से बेरोजगारी का अलम है। आदिवासी युवाओं की अज्ञानता और बेरोजगारी का फायदा नक्सली उठा रहे हैं। भोलेभाले आदिवासी युवाओं को गुमराह कर नक्सली गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। उनके कंधों पर बूंदक रख कर रक्तपात किया जा रहा है, जबकि माओवाद की वैचारिक विंग के लोग शहरों में रहकर अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ा रहे हैं। 

जवान के शहीद होने पर मानवाधिकार मौन
देशभक्ति के नाम पर आदिवासी युवाओं की भावनाओं को भड़काने का काम किया जा रहा है। प्रतिरोध की भावना से नक्सली संगठन से जुड़े युवाओं को रक्तपात के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। नक्सली हमले के विरोध में पुलिस की जवाबी कार्रवाई को मानवाधिकार के नाम पर उंगली उठाकर पुलिस का मनोबल कम किया जाता है। वहीं नक्सलियों से लड़ते-लड़ते पुलिस का जवान शहीद हो जाने पर मानवाधिकार की चर्चा नहीं होती। आदिवासियों को नक्सली संगठन में जाने से रोकने के लिए सरकार से ठोस उपाययोजना करने की उन्होंने अपील की। पत्र परिषद में अनिता रणदिवे, मेहराज हकीम, अल्का रणदिवे, लता पाथर, रेणु बंडावार, विकी प्रधान आदि उपस्थित थे।

पति खोने का गम है
संगीता मांदाड़े ने कहा कf पुलिस अधीक्षक सुवेज हक ने शहीद जवानों की विधवाओं को एकजुट किया। जानकी शहीद पुलिस परिवार विविध वस्तु व सेवा सहकारी संस्था की स्थापना कर शहीदों की विधवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। आज संस्था के माध्यम से बड़े-बड़े ठेके लिए जाते हैं। नक्सलियों का मुकाबला करते हुए पति शहीद हुए, इसका अभिमान है, परंतु हमारे बीच से उनके चले जाने का गम है। बच्चों को पिता का साया नहीं मिला। माता-पिता ने अपना सपूत गंवा दिया। इस कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। भविष्य में औरों पर यह नौबत नहीं आनी चाहिए। इसके लिए नक्सली समस्या का कायम हल होना चाहिए।