दैनिक भास्कर हिंदी: केदारनाथ में बोले मोदी- 'मेरे प्रस्ताव से दिल्ली में मच गया था हड़कंप'

October 21st, 2017

डिजिटल डेस्क, देहरादून। छह महीने में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ मंदिर के दर्शन करने पहुंचे। यहां पहुंचकर पीएम मोदी ने रुद्राभिषेक किया और पूजा-अर्चना की और करीब 20 मिनट तक यहां रुके। उनकी यात्रा के अगले ही दिन यानी शनिवार से केदारनाथ मंंदिर के पट सर्दियों के लिए बंद हो जाएंगे। मोदी ने यहां रैली को भी संबोधित किया। रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला किया है। पीएम ने कहा कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव पर दिल्ली में हड़कंप मचा गया था। पीएम ने कहा कि केदारनाथ में बाढ़ से हुए नुकसान के बाद जब मैंने पुनर्निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा, तो राज्य सरकार तो मान गई, लेकिन इस बात का पता चलते ही दिल्ली में हड़कंप मच गया। केदारनाथ में मोदी ने पांच योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि मोदी ने उनकी परियोजनाओं का ही शिलान्यास कर दिया है। वे पहले से इन योजनाओं पर काम शुरू कर चुके थे। 

मेरी मदद से कांग्रेस को हो गई थी परेशानी

पीएम मोदी ने कहा कि जब 2013 में उत्तराखंड में बाढ़ आई थी और केदारनाथ में भारी तबाही मची थी तो मुझे काफी दुख हुआ था। मैं उस वक्त गुजरात का सीएम था और मैं उत्तराखंड आया था। मैंने यहां आकर केदारनाथ के पुनर्निर्माण की बात कही थी और कहा था कि इस काम में गुजरात सरकार मदद करना चाहती है। उस समय राज्य की कांग्रेस सरकार मान गई थी और मैंने ये बात मीडिया में भी बता दी थी। उन्होंने आगे कहा कि, जैसे ही मेरी इस मदद की खबर आई, तो दिल्ली में हड़कंप मच गया। उसके बाद राज्य सरकार को घोषणा करनी पड़ी कि हमें गुजरात सरकार की जरुरत नहीं। जब मुझे पता चला कि दिल्ली में बैठे लोगों को मेरे काम से परेशानी हो रही है, तो मैं पीछे हट गया। 

बाबा चाहते थे कि बेटे के हाथ से काम हो

कांग्रेस पर हमला करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि बाबा ने तय किया था कि ये काम बेटे के हाथ ही होना था। जब उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार बनी तो मेरा विश्वास पक्का हो गया कि ये काम मुझे ही करना है। कपाट खुलने पर संकल्प करके गया था और कपाट बंद होने से पहले पहुंच गया हूं। केदारनाथ के भव्य पुनर्निर्माण का आज शिलान्यास हो रहा है। इसके आगे पीएम मोदी ने कहा कि बाबा का आशीवार्द सभी पर बना रहे, ऐसी कामना करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि आज से गुजरात जैसे राज्य में नववर्ष शुरू हो रहा है, उन लोगों को भी मेरी शुभकामनाएं। 

पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी काम आए

पीएम मोदी ने यहां पर 5 योजनाओं का शिलान्यास भी किया। पीएम ने कहा कि केंद्र सरकार यहां के पुजारियों को रहने के लिए बेहतर आवास मुहैया कराएगी। मोदी ने कहा कि यहां पर 24 घंटे पानी-बिजली होगी और सड़क को चौड़ा किया जाएगा ताकि यहां आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। पीएम ने कहा कि मैं यहां पर आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण भी कराने का प्लान कर रहा हूं। मुझे पता है कि इसके लिए बहुत सारा खर्च होगा, लेकिन मैं जानता हूं कि धन की कमी ये देश कभी नहीं होने देगा। पीएम ने आगे कहा कि, 'हमारे यहां एक कहावत है कि पहाड़ का पानी और उसकी जवानी पहाड़ के काम नहीं आती लेकिन हमने बीड़ा उठाया है कि पहाड़ की जवानी और पानी दोनों पहाड़ के काम आना चाहिए। हम चाहते हैं कि पहाड़ के पानी से बिजली बने और ये टूरिस्ट एडवेंचर के काम आए।'

 

केदारनाथ का इतिहास: 

देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ मंदिर को 8वीं शताब्दी में आदिगुरु शंकराचार्य ने बनवाया था। ये मंदिर तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। केदारनाथ मंदिर सबसे ऊंचा ज्योतिर्लिंग है, जिसकी ऊंचाई समुद्रतल से 3584 मीटर है। ये मंदिर 85 फीट ऊंचा, 187 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा है। इसकी दीवारें 12 फीट तक मोटी हैं और ये मंदिर 6 फीट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है। इस मंदिर को बड़े-बड़े कटवां पत्थरों को जोड़कर बनाया गया था। पीएम मोदी के दौरे के बाद शनिवार को इस मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और इसके बाद मई-2018 में इसके कपाट खोले जाएंगे।  

बाढ़ के बाद केदारनाथ का पुनर्निर्माण करना चाहते थे मोदी

साल 2013 में आई बाढ़ ने केदारनाथ में भारी तबाही मचाई थी। उस समय पीएम मोदी केदारनाथ का पुनर्निर्माण करना चाहते थे, लेकिन उस समय की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मोदी के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसी कारण जब पीएम मोदी 6 महीने पहले केदारनाथ की यात्रा पर गए थे, तो वहां पर बाढ़ की तबाही के निशान देखने के बाद केदारपुरी को नया बनाने का मन बनाकर लौटे थे और अब पीएम मोदी ने इस बार न केवल केदारनाथ के दर्शन किए बल्कि नई केदारपुरी की आधारशिला भी रखी।