दैनिक भास्कर हिंदी: उम्रकैद की सजा भुगत रहे प्रोफेसर साईबाबा ने हाइकोर्ट से वापस ली याचिका

February 27th, 2018

डिजिटल डेस्क,नागपुर। नक्सल समर्थन के आरोप में नागपुर मध्यवर्ती कारावास में उम्रकैद की सज़ा काट रहे प्रोफेसर जी एन साईबाबा ने गडचिरोली सत्र न्यायालय के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी| मामले में मंगलवार को सुनवाई  अपनी याचिका में संशोधन करने का हवाला देकर साईबाबा ने याचिका वापस ले ली|

भुगत रहे उम्रकैद की सजा
बता दे गड़चिरोली जिला व सत्र न्यायालय ने प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा और अन्य पांच को नक्सलियों की मदद करने का दोषी पाया है। न्यायालय ने प्रोफेसर साईबाबा, हेम मिश्रा, प्रशांत राही, महेश तिरकी, पांडू नरोटे को उम्रकैद और विजय तिरकी को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। निचली अदालत ने देश विरोधी गतिविधियों और प्रतिबंधित संगठन के सदस्य होने का दोषी पाया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र गड़लिंग ने पक्ष रखा।

यह है मामला
गड़चिरोली पुलिस ने दिल्ली के जेएनयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हेम मिश्रा को अगस्त 2013 में महेश तिरकी और पांडू नरोटे के साथ अहेरी से गिरफ्तार किया था। हेम मिश्रा से पूछताछ के बाद पुलिस ने सितंबर 2013 में प्रशांत राही काे भी गिरफ्तार किया। नक्सली नेता गणपति व नर्माद अक्का और प्रोफेसर साईबाबा के बीच मध्यस्थता करने का दावा पुलिस की ओर से किया गया। 23 दिसंबर 2015 साईबाबा ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था।

दायर की थी याचिका
साईबाबा को मई 2014 में गड़चिरोली पुलिस ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का सदस्य होने तथा उन्हें साजो-सामान मुहैया कराने और समूह के लिए भर्ती में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।  बता दे कि इसके पूर्व भी आरोपियों ने कोर्ट में जमानत प्राप्त करने और सज़ा खारिज करने की प्रार्थना की थी| मगर उन्हें राहत नही मिल सकी| ऐसे में।एक बार फिर साईबाबा ने रिहाई के लिए याचिका दायर की| मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान साईबाबा के वकील ने अपनी इस नई याचिका में कुछ कानूनी दांवपेंच में सुधार करने के लिए याचिका वापस लेने की अनुमति देने की प्रार्थना की थी| कोर्ट ने उसे याचिका वापस लेने की अनुमति दी थी|