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कोलकाता मामले का विरोध - मेयो, मेडिकल में मार्ड के डॉक्टरों ने की सांकेतिक हड़ताल

कोलकाता मामले का विरोध - मेयो, मेडिकल में मार्ड के डॉक्टरों ने की सांकेतिक हड़ताल

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोलकाता में जूनियर डॉक्टरों के साथ हुई हिंसक घटना के विरोध में निवासी डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल का नागपुर में भी असर रहा। सेंट्रल मार्ड के आह्वान पर शासकीय मेडिकल कॉलेज तथा अस्पताल व इंदिरा गांधी वैद्यकीय महाविद्यालय तथा अस्पताल में मार्ड के डॉक्टरों ने सांकेतिक हड़ताल की। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक हड़ताल जारी रही। इसके बाद अधिष्ठाता को ज्ञापन सौंपकर डॉक्टर हड़ताल से वापस लौट गए। डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल प्रशासन की ओर से प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, लेक्चरर, इन सर्विस डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंस डॉक्टर्स की ओपीडी में सेवा ली गई, जिससे स्वास्थ्य सेवा पर कोई खास असर नहीं पड़ा। हालांकि रोज के मुकाबले हड़ताल की पूर्व सूचना के चलते अस्पताल में मरीजों की भीड़ कम रही।

पैदल मार्च निकाल कर किया प्रदर्शन

शासकीय मेडिकल कॉलेज तथा अस्पताल में मार्ड के डॉक्टर सुबह आपातकालीन विभाग के सामने इकट्ठे हुए। हाथ में निषेध के पोस्टर लेकर पैदल मार्च निकाले। आपातकालीन विभाग से ओपीडी और वहां से अधिष्ठाता कार्यालय पहुंचे। कोलकाता में जूनियर डॉक्टरों के साथ हुई हिंसक घटना का निषेध किया। अधिष्ठाता को ज्ञापन सौंपकर सरकार से डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करने व दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई। दुर्घटना विभाग, अतिदक्षता विभाग तथा ट्रॉमा सेंटर को हड़ताल मुक्त रखा गया। मेडिकल में मार्ड के डॉक्टर्स तथा इंटर्नशिप सहित 200 से अधिक तथा मेयो में 150 डॉक्टरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। शासकीय मेडिकल कॉलेज में मार्ड के अध्यक्ष डॉ. मुकुल देशपांडे और मेयो अस्पताल में डॉ. अंचलेश टेकाम ने हड़ताल का नेतृत्व किया।

सीनियर डॉक्टरों पड़ा बोझ

मार्ड की हड़ताल का स्वास्थ्य सेवा पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन सीनियर डॉक्टरों पर सेवा का बोझ पड़ा। उन्हें सुबह से शाम तक अस्पताल में बिताना पड़ा। सुबह ओपीडी की कमान और दोपहर बाद वार्ड में सेवा देनी पड़ी।

आंदोलन जारी रहेगा

अध्यक्ष मार्ड मेडिकल डॉ. मुकुल देशपांडे के मुताबिक सांकेतिक हड़ताल कर डॉक्टराें की सुरक्षा पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया। कोलकाता की हिंसक घटना में लिप्त दोषियों पर जब तक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। इसके आगे काला फीता लगाकर मरीजों की सेवा तथा आंदोलन के अन्य रास्ते अपनाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।

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